फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने फतेहपुर में तैनात लेखपाल (Lekhpal) सुधीर कुमार की आत्महत्या (suicide) को प्रशासनिक अमानवीयता की पराकाष्ठा बताते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री को संबोधित 6 सूत्रीय ज्ञापन उपजिलाधिकारी रजनीकांत को सौंपा। संगठन ने कहा कि छुट्टी न देकर, शादी के दिन भी ड्यूटी का दबाव बनाना और अनुपस्थित होने पर निलंबन जैसी कार्रवाई करना सीधे तौर पर प्रशासनिक उत्पीड़न का मामला है, जिसने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।
ज्ञापन में बताया गया कि लेखपाल सुधीर कुमार की शादी 26 नवंबर को थी, जिसके लिए उन्होंने अवकाश का आवेदन दिया था, लेकिन ड्यूटी का हवाला देकर छुट्टी नहीं दी गई। आरोप है कि जब वे ए0आर0 मीटिंग में नहीं पहुंचे तो उन्हें निलंबित कर दिया गया और परिवार को सूचना भेज दी गई कि वह ‘दूसरा काम देखें’। निलंबन की खबर से मानसिक तनाव बढ़ने पर सुधीर कुमार ने आत्महत्या कर ली।
लेखपाल संघ ने इसे प्रशासन की सबसे बड़ी मानवीय विफलता बताते हुए कहा कि इस घटना ने विभागीय कार्यव्यवस्था की वास्तविकता उजागर कर दी है।संगठन ने ज्ञापन में मांग की कि इस मामले में मुख्य आरोपी पीसीएस अधिकारी संजय कुमार सक्सेना को एफआईआर में अज्ञात की जगह नामजद किया जाए।
मृतक की माता को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। साथ ही एसआईआर की अंतिम तिथि बढ़ाने और कम समय में अत्यधिक दबाव वाले कार्यों से कर्मचारियों के स्वास्थ्य व जीवन को होने वाले खतरे को ध्यान में रखते हुए नियमों में संशोधन करने की भी मांग की गई। लेखपाल संघ ने लेखपालों की नियमित बैठकें कराने और मानदेय समय से सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
इस दौरान संगठन के महामंत्री अभय त्रिवेदी ने कहा कि फतेहपुर की घटना पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है। शादी के दिन तक अवकाश न देना और ऊपर से निलंबन की कार्रवाई करना अमानवीय और निंदनीय है। दोषी अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, अन्यथा लेखपाल संघ बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा।
ज्ञापन सौंपने के समय संगठन के अध्यक्ष महेश्वर सिंह, महामंत्री अभय त्रिवेदी, लेखपाल अमित राठौर, सर्वेश कुमार, रघुवंश कुमार, अमित प्रताप, हरमुख पाल, अतुल प्रताप सिंह सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।


