यूरिया की किल्लत गहराई, आलू की फसल पर संकट

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कुछ किसानों को मात्र पांच पांच बोरी देकर निपटा रही समितियां

फर्रुखाबाद| जनपद में साधन सहकारी समितियों और निजी दुकानों पर यूरिया खाद की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि किसान रोजाना समितियों और दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन स्टॉक न आने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई स्थानों पर किसानों को ज़रूरत के मुकाबले बेहद कम मात्रा में—मात्र पांच-पांच बोरी यूरिया देकर ही संतुष्ट किया जा रहा है, जिससे नाराज़गी और अधिक बढ़ गई है।
इधर आलू की फसल का सबसे निर्णायक चरण शुरू हो चुका है। इस समय खेतों में दूसरा और तीसरा पानी लगने का समय है जो आलू की बढ़वार, गांठ बनने और पौधे को मजबूती देने के लिए अनिवार्य माना जाता है। किसानों का कहना है कि बिना यूरिया खाद के यह सिंचाई लगभग बेअसर हो जाती है, क्योंकि आलू के पौधे की वास्तविक बढ़ोतरी इन्हीं दोनों पानी के बाद होती है।
किसान परेशान हैं कि खेत तैयार हैं, ट्यूबवेल चल रहे हैं, लेकिन खाद न मिलने से फसल कमजोर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। जिन किसानों को पांच पांच बोरी यूरिया दी गई है, उनका कहना है कि यह मात्रा बेहद कम है और बड़े रकबे की खेती के लिए पर्याप्त नहीं है।
किसान नेता और संगठन प्रशासन से तत्काल यूरिया की उपलब्धता बढ़ाने, समितियों पर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित कराने और जरूरत के अनुसार वितरण करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आलू उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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