विकसित भारत का संकल्प जरूर पूरा होगा: राष्ट्रपति मुर्मु
नई दिल्ली। देश की लोकतांत्रिक विरासत और संवैधानिक आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से बुधवार को संसद के ऐतिहासिक संविधान सदन (सेंट्रल हॉल) में संविधान दिवस 2025 का भव्य और गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। इस आयोजन की अध्यक्षता स्वयं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की, जिनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम के महत्व को और अधिक विशेष बना दिया। उनके साथ उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्रिपरिषद के वरिष्ठ सदस्य और देशभर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी समारोह में मौजूद रहे, जिससे कार्यक्रम ने सर्वदलीय और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रेरक और मार्गदर्शक संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने संविधान को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए कहा कि इसके मूल्यों के संरक्षण में हर नागरिक की भूमिका सर्वोपरि है। इसके पश्चात उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने संविधान को सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक शक्ति का केंद्र बताया। समारोह के अंतिम चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि “हमारे संविधान का केंद्रीय तत्व सामाजिक न्याय है। यह सिर्फ एक सिद्धांत नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का आधार है, जिसे हमें हर परिस्थिति में कायम रखना है।” इसके बाद राष्ट्रपति के नेतृत्व में पूरे सेंट्रल हॉल में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया, जो समारोह का सबसे भावनात्मक और प्रेरक क्षण रहा।
इस अवसर पर संविधान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का डिजिटल माध्यम से विमोचन भी किया गया। विधायी विभाग द्वारा तैयार नौ भारतीय भाषाओं—मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओडिया और असमिया—में भारतीय संविधान के संस्करणों का लोकार्पण किया गया। यह कदम देश की भाषाई विविधता, समावेशिता और व्यापक जनभागीदारी को सम्मान देने का प्रतीक माना गया। इसी के साथ संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार की गई स्मारक पुस्तिका “भारत के संविधान से कला और कैलीग्राफी” (हिंदी संस्करण) का भी विमोचन किया गया, जिसमें संविधान की प्रस्तावना और अन्य भागों की मूल प्रतियों में प्रयुक्त मनोहरी कला और लेखन शैली को संरक्षित किया गया है।
संविधान दिवस 2025 को केवल संसद ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एक राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। सभी केंद्रीय मंत्रालय, विभाग, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और संस्थाएं विभिन्न आयोजनों के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचा रही हैं। नागरिकों को मायजीओवी.इन और संविधान75.कॉम पर संविधान की प्रस्तावना के ऑनलाइन वाचन में शामिल होने का अवसर दिया गया है। साथ ही प्रमाणपत्र सृजन, सोशल मीडिया पर संवैधानिक संदेशों का साझा करना, राष्ट्रीय ऑनलाइन क्विज, निबंध और ब्लॉग प्रतियोगिताएं भी बड़े स्तर पर आयोजित की जा रही हैं।
इसके अलावा देशभर में सम्मेलन, सेमिनार, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं, लघु फिल्मों के प्रदर्शन, थीम आधारित प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पोस्टर/पेंटिंग प्रतियोगिताएं और रंगोली निर्माण जैसी गतिविधियां निरंतर आयोजित की जा रही हैं। पंचायत स्तर से लेकर संसद तक संविधान पर आधारित विशेष चर्चाएं और कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि भारत केवल अपने संविधान को पढ़ता ही नहीं, बल्कि उसे जीता भी है।


