जस्टिस सूर्यकांत ने ली देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश की शपथ, राष्ट्रपति मुर्मू ने दिलाई शपथ

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नई दिल्ली। भारत के न्यायिक इतिहास में सोमवार का दिन एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में दर्ज हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ न्यायाधीश, संवैधानिक पदाधिकारी और विदेशी राजनयिक मौजूद रहे। जस्टिस सूर्यकांत ने मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस भूषण रमेश गवई के सेवानिवृत्त होने के बाद यह जिम्मेदारी संभाली है। परंपरा के मुताबिक CJI गवई ने ही संविधान के अनुच्छेद 124(2) के अंतर्गत अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत के नाम की अनुशंसा की थी, जिस पर सरकार और राष्ट्रपति ने अनुमोदन दिया। लगभग 15 महीने के कार्यकाल के दौरान जस्टिस सूर्यकांत 9 फ़रवरी 2027 तक देश की न्याय व्यवस्था की सर्वोच्च कमान संभालेंगे। जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेटवार गांव में हुआ। सरल पृष्ठभूमि से आगे बढ़ते हुए उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातक व एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और 1984 में बतौर एडवोकेट करियर की शुरुआत की। मजबूत कानूनी समझ और सादगीपूर्ण व्यवहार के चलते 2000 में वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बने। वर्ष 2004 में हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल नियुक्त होने के बाद 2007 में वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। इसके बाद 2019 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और 2022 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त हुए। जस्टिस सूर्यकांत उन महत्वपूर्ण संवैधानिक पीठों का हिस्सा रहे हैं, जिनके फैसलों का राष्ट्रीय प्रभाव पड़ा है। वे अनुच्छेद 370 हटाने की वैधता पर सुनवाई करने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ का हिस्सा रहे। इसके अलावा चुनाव आयोग को मतदाता सूची जारी करने, गैंगस्टर एक्ट के दुरुपयोग, पर्यावरण संरक्षण, राज्य पुलिस सुधार, गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कई मानवाधिकार संबंधी मामलों में उनके निर्णयों को न्यायिक दृष्टि से मील का पत्थर माना गया है। अपनी संतुलित न्यायिक सोच, जन-संवेदनशीलता और सजग नेतृत्व क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले जस्टिस सूर्यकांत से देश को उम्मीद है कि वे अपने कार्यकाल में न्यायिक प्रणाली में लंबित मामलों को कम करने, तकनीक के बेहतर उपयोग, न्यायपालिका की पारदर्शिता बढ़ाने और संवैधानिक मूल्यों को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे। उनके कार्यभार संभालने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट और संपूर्ण देश की न्याय व्यवस्था में नई ऊर्जा और नई दिशा की अपेक्षाएं तेज हो गई हैं।

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