लखनऊ। राजधानी के पॉश इलाके गोमतीनगर से सटा छोटा भरवारा आज भी मूलभूत सुविधाओं के मोहताज है। करीब 50 हजार की आबादी सड़क, नाली, सीवर, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी अनिवार्य सुविधाओं के अभाव में रोजाना परेशानियों से जूझ रही है। वर्ष 2018 में नगर निगम सीमा में शामिल किए जाने के बावजूद अब तक यहां विकास कार्य आगे नहीं बढ़ सके। स्थानीय लोग पिछले कई वर्षों से टैक्स अदा कर रहे हैं, लेकिन सुविधाएं कागजों से बाहर नहीं निकल सकीं।
क्षेत्र में अधिकांश सड़कें कच्ची और उबड़-खाबड़ हैं, जिन पर हल्की बारिश में भी कीचड़ व जलभराव हो जाता है। कई इलाकों में नालियां पूरी तरह चोक हो चुकी हैं, जिसके चलते बरसात के दिनों में घरों-दुकानों के बाहर तक पानी भर जाता है। लगातार जमा गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और लोगों का कहना है कि डेंगू-मच्छरजनित बीमारियों के मामले यहां आम बात बन गए हैं।
गंगोत्री विहार, विनय एनक्लेव और आसपास की कॉलोनियों में स्थिति और भी बदतर है। जगह-जगह खाली प्लॉटों में गंदा पानी भरा है, जिससे सीलन, बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। बरसात के दौरान स्कूल वैन तक इन गलियों में नहीं पहुंच पातीं। कई परिवार बताते हैं कि उनके घर वर्षों पुराने हैं और लगातार जलभराव से नींव तक कमजोर हो रही है।
स्थानीय धार्मिक स्थल तक पहुंचने का रास्ता भी कच्चा है। लोगों ने अपने स्तर पर मलबा डालकर अस्थायी रास्ता बनाया, लेकिन बरसात आते ही वह भी दलदल में बदल जाता है। श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
एलान के बावजूद अब तक क्षेत्र में न तो सीवर लाइन बिछाई गई, न सड़क-नाली का निर्माण हुआ। बिजली के खंभे तो लगे हैं लेकिन स्ट्रीट लाइटें न होने से क्षेत्र अंधेरे में डूबा रहता है। लोगों का कहना है कि सफाईकर्मियों की तैनाती सिर्फ कागजों में होती है, जमीनी स्तर पर सफाई नहीं होती।
लंबे समय से समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम, पार्षद और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायतें की जाती रही हैं, लेकिन क्षेत्रवासियों के अनुसार कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने सड़क, नाली, सीवर और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की पुरजोर मांग की है, ताकि उन्हें शहर के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं मिल सकें और जीवनयापन आसान हो सके।





