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Wednesday, December 31, 2025

खुफिया इकाई और कोतवाली पुलिस की निष्क्रियता से बड़ा विवाद, दिनदहाड़े सदर विधायक का पुतला फुकना सरकार की साख पर सवाल

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फर्रूखाबाद। जिले की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हुए रविवार को त्रिपोलिया चौक पर दिनदहाड़े सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी का पुतला फूंका गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि स्थानीय अधिसूचना इकाई और सदर कोतवाली पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय बनी रही, जिसके चलते इस कृत्य को अंजाम देने वालों के हौसले और बढ़ गए तथा सरकार की साख पर सार्वजनिक रूप से चोट पहुंचाई गई।

 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ युवकों को संगठित तरीके से आगे कर अपमानजनक नारे लगवाए गए, जिनमें विधायक को लेकर अशोभनीय और बेतुके आरोप लगाए गए। इसके बाद सार्वजनिक स्थल पर पुतला फूंककर जिले की कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दी गई। दो दशक के भीतर जिले में इस तरह की यह पहली घटना मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार यह विवाद केवल कुछ युवकों की स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक बड़े माफिया नेटवर्क की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि हाल ही में प्रशासन ने मानस मंदिर ट्रस्ट पर हुए कब्जे और उससे जुड़े भूमाफिया तंत्र पर कार्रवाई तेज कर दी थी। इस कार्रवाई से परेशान माफिया गिरोहों ने सरकार को नीचा दिखाने और विधायक की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से युवाओं को मोहरा बनाकर यह कार्रवाई कराई।

इसी क्रम में सोशल मीडिया पर भी एक पोस्ट तेजी से वायरल कराई गई, जिसमें सदर विधायक के पटल पर बीयर की बोतल रखी दिखाई गई। जांच में सामने आया है कि यह भी उसी नेटवर्क की रणनीति का हिस्सा था, जो विधायक और सरकार को बदनाम करने के लिए फर्जी और भ्रामक सामग्री का इस्तेमाल कर रहा है।

सूत्र यह भी बताते हैं कि इस पूरे प्रकरण के पीछे एक चर्चित वकील का नाम सामने आ रहा है, जिस पर प्रशासन का शिकंजा पिछले कुछ महीनों से कसता जा रहा है। कई मामलों में कार्रवाई के डर से वह लगातार उच्च न्यायालय की शरण में है। सरकार द्वारा उसके काले कारनामों पर लगाम कसने के बाद से वह राजनीतिक माहौल को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है और उसी क्रम में ये घटनाएँ सामने आ रही हैं।

स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि पुलिस-प्रशासन से यह सवाल उठा रहे हैं कि “दिनदहाड़े शहर के व्यस्त चौराहे पर पुतला जल गया, नारेबाज़ी हो गई, और पुलिस कहाँ थी?”

जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि माफियाओं का संगठित गिरोह किस तरह माहौल को बिगाड़ने की कोशिश में जुटा है।प्रशासनिक सख्ती और त्वरित कार्रवाई की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

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