आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, होसबाले और कृष्ण गोपाल का यूपी दौरा तेज, पीएम से पहले संघ की रणनीति सक्रिय

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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 नवंबर को अयोध्या में होने वाले राम मंदिर ध्वजारोहण कार्यक्रम से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी गतिविधियों को अत्यधिक गति दे रहा है। रविवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत लखनऊ पहुंचे, जहाँ जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित भव्य ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ में हजारों श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और संतों की उपस्थिति में शामिल होने का उनका कार्यक्रम है। इस आयोजन को राजनीतिक और सामाजिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से संघ समाज के विभिन्न वर्गों तक अपना वैचारिक संदेश पहुंचाने की कोशिश में है।

कार्यक्रम के बाद मोहन भागवत संघ और भाजपा के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक करेंगे। इस बैठक में आगामी वर्ष में प्रस्तावित संघ के शताब्दी वर्ष के आयोजनों की समीक्षा, उनकी प्रगति तथा विस्तार योजनाओं पर गहन चर्चा होने की संभावना है। सूत्र बताते हैं कि संघ इस अवसर को देशव्यापी विस्तार और वैचारिक सुदृढ़ीकरण के बड़े अभियान के रूप में देखने की तैयारी कर रहा है। इसी क्रम में मोहन भागवत 24 नवंबर की सुबह अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर में दर्शन करेंगे और ध्वजारोहण पूर्व की व्यवस्थाओं की जानकारी भी लेंगे।

उधर, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले भी तीन दिवसीय प्रवास पर शनिवार को ही कानपुर पहुंच चुके हैं। रविवार को उन्होंने कानपुर प्रांत के स्वयंसेवकों, प्रांत अधिकारियों और जिला संयोजकों के साथ लंबे समय तक बैठक की। इस बैठक में संघ के विस्तार, स्थानीय इकाइयों के पुनर्गठन, सेवा कार्यों के प्रसार और 2027 की राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रभावी भूमिका को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। सोमवार को दत्तात्रेय होसबाले महिला समन्वय समिति की बैठक में भाग लेंगे, जिसमें भाजपा से जुड़े संगठनों के अलावा कई अन्य वैचारिक संगठनों की महिला प्रतिनिधियों की भी भागीदारी होगी। इसे महिला मोर्चे के सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

इसी तरह संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल भी शनिवार को लखनऊ पहुंचकर सक्रिय हो चुके हैं। उन्होंने देर रात तक संघ के विभिन्न विभागों के प्रमुखों के साथ बैठकों का सिलसिला जारी रखा। सूत्रों के अनुसार, कृष्ण गोपाल की बैठकें मुख्यतः वैचारिक प्रशिक्षण, युवा संपर्क अभियान, और लोकसभा–विधानसभा चुनावों के मद्देनजर समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँच बढ़ाने पर केंद्रित रहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस और भाजपा का यह सक्रिय समन्वय आने वाले महीनों में राज्य की राजनीतिक जमीन को और गर्म करेगा। संघ के शताब्दी वर्ष और भाजपा के 2027 विधानसभा चुनाव—दोनों ही संगठन के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। यही वजह है कि भाजपा पहले ही बूथ स्तर पर संपर्क, घर-घर पहुंच और लाभार्थी संवाद जैसे अभियानों को तेज कर चुकी है। संघ का यह संगठित दौरा और बैठकों की श्रृंखला भाजपा की चुनावी रणनीति को और धार देने वाली मानी जा रही है।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के अंतिम चरण के साथ केंद्र और राज्य—दोनों स्तरों की राजनीति एक बार फिर मंदिर मुद्दे के इर्द-गिर्द सक्रिय होती दिख रही है। पीएम मोदी के 25 नवंबर के दौरे से पहले आरएसएस की यह व्यापक हलचल संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में संघ की भूमिका और अधिक प्रभावी रूप में दिखाई देगी।

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