आयोग ने 2029-30 तक लॉस कम करने का दिया निर्देश
लखनऊ| उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने शनिवार को लंबे इंतजार और विस्तृत सुनवाई के बाद नई बिजली दरें घोषित कर दीं। उपभोक्ताओं के लिए राहत की बड़ी खबर यह है कि इस वर्ष भी बिजली दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके साथ ही यूपी देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां लगातार छठे वर्ष बिजली दरों में एक भी पैसा नहीं बढ़ा। महंगाई के दौर में यह निर्णय सीधे तौर पर 2.91 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है।
हालांकि, बिजली चोरी और लाइन लॉस पर अब आयोग बेहद सख्त रुख अपनाने वाला है। आयोग ने वितरण निगमों को निर्देश दिया है कि वर्ष 2024-25 के 13.78% वितरण हानि को घटाकर 2029-30 तक 10.74% पर लाना अनिवार्य है। इसका सीधा प्रभाव ग्रामीण इलाकों में देखने को मिलेगा, जहां अब तक कई जगह बिना मीटर, टूटी-फूटी लाइनें या अवैध कनेक्शन के सहारे बिजली खपाई जाती रही है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी, और निगम अपने घाटे का ठीकरा उपभोक्ताओं पर नहीं फोड़ पाएंगे।
उपभोक्ताओं की जीत, पावर कॉर्पोरेशन की हार
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली दरें न बढ़ाए जाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि राज्य सरकार व आयोग ने उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत देने का निर्णायक काम किया है।
अवधेश वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी बधाई देते हुए कहा कि छह वर्षों से बिजली दरें स्थिर रखकर सरकार ने देश में एक अनूठा रिकॉर्ड बनाया है। उल्लेखनीय है कि पावर कॉर्पोरेशन ने इस वर्ष 45% बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव आयोग के समक्ष रखा था, जिसे उपभोक्ता परिषद ने जोरदार तर्कों के साथ चुनौती दी।
परिषद ने आयोग के सामने यह तथ्य रखा कि उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर पहले से ही 33122 करोड़ रुपये का सरप्लस जमा था। इस वर्ष भी उपभोक्ताओं का 18592 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सरप्लस सामने आया है। यानी कुल सरप्लस बढ़कर 51000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। ऐसे में दरें बढ़ाने का प्रस्ताव अनुचित था।
एनपीसीएल मामले में भी उपभोक्ता परिषद की बड़ी जीत
नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) के उपभोक्ताओं के लिए भी बड़ी राहत की खबर है। उपभोक्ता परिषद द्वारा प्रस्तुत तर्कों को स्वीकार करते हुए नियामक आयोग ने एनपीसीएल क्षेत्र की बिजली दरें भी यथावत रखने का फैसला सुनाया है। साथ ही उपभोक्ताओं को दी जा रही 10% की छूट आगे भी जारी रहेगी।
अब बिजली चोरी पर चलेगी सख्त कार्रवाई
आयोग के नए निर्देशों से यह भी साफ है कि आगामी वर्षों में बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान तेज होगा। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में बिना मीटर कनेक्शन, अवैध लाइन और ‘कटिया’ प्रथा पर पूरी तरह रोक लगनी तय है। निगमों के अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय होगी, क्योंकि वितरण हानि कम करना अब उनकी सीधी जिम्मेदारी होगी।
यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए राहत और बिजली निगमों के लिए अनुशासन का संदेश लेकर आया है। आयोग ने साफ संकेत दिया है कि पारदर्शिता और दक्षता के साथ बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने का समय आ गया है।


