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Wednesday, January 14, 2026

SKM इंटर कॉलेज की फाइल ‘गायब’ कराने की साज़िश?—जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में प्रबंधक अवधेश मिश्रा का नेटवर्क सक्रिय

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– बंदर की कहानी से दस्तावेज़ नष्ट करने की तैयारी!

– दो पूर्व जिलाधिकारियों के मुकदमा दर्ज करने के आदेश, त्रिस्तरीय जांच रिपोर्ट और प्रमुख दस्तावेज़ी प्रमाणों वाली फाइल पर संकट
– लिपिक राजीव यादव व प्रबंधक के खास लोगों की संदिग्ध मौजूदगी से गहराए सवाल

फर्रुखाबाद: जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में एसकेएम इंटर कॉलेज (SKM Inter College) चांदपुर नवाबगंज से जुड़ी ‘महत्वपूर्ण फाइल’ को गायब या क्षतिग्रस्त करने की गहरी साज़िश की खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार प्रबंधक अवधेश मिश्रा (Awadhesh Mishra) और उनकी प्रधानाचार्य पत्नी रीता पाठक मिश्रा के करीबी बाबुओं के माध्यम से फाइल में छेड़छाड़ कर सबूत मिटाने का खेल तेज हो चुका है।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एसकेएम इंटर कॉलेज और कृष्णा पब्लिक स्कूल—दोनों की अवैध मान्यताएँ—जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत रहे बाबू राजीव यादव द्वारा ही वर्षों पहले दिलाई गईं थी। राजीव यादव नौकरी लगने के बाद से अब तक लंबे समय से जनपद में ही जमे हुए हैं और अवधेश मिश्रा के बेहद करीबी माने जाते हैं।

वह लिपिक जिसे जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कार्य-मुक्त किया जा चुका है, वह पिछले 15 दिनों से रोज दोपहर 12 बजे से शाम तक डीआईओएस कार्यालय में बैठा देखा जा रहा है। सवाल यह है कि जिस कर्मचारी की कोई जिम्मेदारी नहीं, वह रोज कार्यालय में किसके इशारे पर और किस काम से बैठ रहा है?
जिलाधिकारी ने पूर्व में हुई जांच से संबंधित फाइल डीआईओएस कार्यालय से तलब की है। यही वह फाइल है जिसमें,

दो पूर्व जिलाधिकारियों द्वारा प्रबंधक अवधेश मिश्रा, प्रधानाचार्य रीता पाठक मिश्रा और प्रबंध समिति पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश हैं, त्रिस्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट, और कई भव्य (बड़ी) कार्यवाही के दस्तावेज़। इन्हीं दस्तावेज़ों को मिटाने के लिए छेड़छाड़ की आशंका गहराती जा रही है। शुक्रवार को जिलाधिकारी का पत्र डीआईओएस कार्यालय पहुंचते ही वहां तैनात लिपिक राजीव यादव हरकत में आ गया। सूत्रों के अनुसार उसने कई कर्मचारियों से यह कहकर हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की कि

 

“कार्यालय में बंदर घुस आता है, फाइलें फाड़ देता है।”

 

जबकि कार्यालय में बंदर घुसने की कोई जगह तक नहीं है। यह साफ संकेत देता है कि बंदर का बहाना बनाकर फाइल फाड़ने का ‘प्री-प्रिपेयर्ड गेम प्लान’ तैयार किया जा रहा है। सवाल बेहद गंभीर हैं—जो प्रशासन को झकझोरते हैं, एक कार्य-मुक्त व्यक्ति डीआईओएस कार्यालय में किस अधिकार से बैठ रहा है? क्या फाइल से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ गायब करने की तैयारी है? क्या प्रबंधक अवधेश मिश्रा को बचाने के लिए बंदर की कहानी रची जा रही है? जब डीएम ने फाइल तलब की है, तो डीआईओएस कार्यालय में इतनी भागदौड़ क्यों बढ़ गई है? क्या शिक्षा विभाग के भीतर वर्षों से जमा ‘माफिया-जगत’ अब उजागर होने के डर से हड़बड़ाया हुआ है?

एसकेएम इंटर कॉलेज से जुड़ा यह मामला सिर्फ एक शिक्षा संस्थान का विवाद नहीं है, बल्कि फाइल मैनेजमेंट, विभागीय मिलीभगत, गलत तरीके से दी गई मान्यताएँ, और सबूत मिटाने के संगठित खेल का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। जिलाधिकारी द्वारा तलब की गई फाइल इस पूरे प्रकरण की ‘कुंजी’ है—और यही वजह है कि इसे गायब करने या फाड़ने की तैयारी की आशंका अब खुलकर सामने आ रही है। यह पूरा मामला अब जिले के प्रशासन के लिए ‘लिटमस टेस्ट’ बन गया है कि वे शिक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई करते हैं या फाइलों को ‘बंदर’ खा जाता है।

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