लखनऊ| प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की समस्याएं दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं, लेकिन उनके समाधान की रफ्तार बेहद धीमी है। राज्य विद्युत नियामक आयोग में 11 हजार से अधिक शिकायतें लंबे समय से लंबित पड़ी हैं, जिससे उपभोक्ताओं में गहरी निराशा और असंतोष दिखाई दे रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी न तो समय पर सुनवाई होती है और न ही सही कार्रवाई। मुआवजा कानून लागू होने के बावजूद अब तक किसी भी उपभोक्ता को मुआवजा न मिलना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उपभोक्ता परिषद ने इस स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताया है और कस्टमर केयर नंबर 1912 पर दर्ज लंबित शिकायतों की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग उठाई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतें किन कारणों से निस्तारित नहीं हो रही हैं। परिषद का कहना है कि उपभोक्ताओं को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन विभागीय स्तर पर न तो जवाबदेही तय हो रही है और न ही सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिन्हें लेकर उपभोक्ता बेहद परेशान हैं। कई उपभोक्ता लगातार बिल गड़बड़ी, गलत रीडिंग, और मीटर की तकनीकी खामियों जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसको देखते हुए उपभोक्ता परिषद ने सरकार और विभाग से स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों के लिए विशेष प्रकोष्ठ (सेल) बनाने की मांग की है, ताकि इन तकनीकी मुद्दों का त्वरित समाधान हो सके।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि कस्टमर केयर नंबर 1912 पर इस समय 11,494 शिकायतें लंबित हैं। इनमें से 3,504 शिकायतें केवल स्मार्ट मीटर से संबंधित हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं। वहीं लखनऊ में वर्टिकल प्रणाली के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में ही 1,075 शिकायतें अभी भी निस्तारण की प्रतीक्षा में हैं, जो उपभोक्ताओं की समस्याओं और विभागीय सुस्ती को उजागर करती हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक शिकायतों के समाधान और उनकी मॉनिटरिंग की व्यवस्था मजबूत नहीं होगी, तब तक बिजली आपूर्ति से जुड़ी परेशानियां समाप्त नहीं होंगी। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार और जिम्मेदार विभाग जल्द ठोस कदम उठाएंगे, जिससे व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा दोनों बहाल हो सकें।





