डॉ. सी. वी. रमन जी की पुण्यतिथि पर विशेष
— प्रभात यादव
भारत की वैज्ञानिक विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने वाले महान वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रमन की पुण्यतिथि विज्ञान जगत के लिए केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है। आज के दिन देश उनके अद्भुत वैज्ञानिक योगदान, उनकी जिज्ञासा, उनकी खोजों की चमक और विश्व के सामने भारतीय प्रतिभा को स्थापित करने वाली उनकी महान उपलब्धियों को नमन करता है।
डॉ. रमन की सबसे बड़ी उपलब्धि वह वैज्ञानिक खोज है जिसने दुनिया की समझ बदल दी — रमन प्रभाव। 1928 में की गई यह खोज आज भी स्पेक्ट्रोस्कोपी, रासायनिक संरचना विश्लेषण, चिकित्सा अनुसंधान, नैनो टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष विज्ञान जैसी अनेकों क्षेत्रों की नींव है।
यह खोज इतनी महत्वपूर्ण थी कि उन्हें 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ — विज्ञान के क्षेत्र में यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय बने।
देश ने उनके योगदान को सम्मान देने के लिए 1954 में भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किया।
डॉ. रमन इस सम्मान के पूरी तरह हकदार थे, क्योंकि उन्होंने विज्ञान को केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण और मानव विकास की प्रक्रिया से जोड़ा।
डॉ. रमन की सबसे बड़ी खूबी थी—विज्ञान के प्रति उनकी अटूट जिज्ञासा। वे कहते थे:
“विज्ञान में महानता केवल साधनों से नहीं, जिज्ञासा और समर्पण से मिलती है।”
सीमित संसाधनों, मुश्किल परिस्थितियों और औपनिवेशिक भारत के समय में भी उन्होंने वैज्ञानिक प्रयोगों को जारी रखा और विश्व में यह संदेश दिया कि प्रतिभा साधनों की मोहताज नहीं।
डॉ. रमन ने भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण संस्थानों में योगदान दिया, जैसे
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, (IISc), बेंगलुरु,
रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट, बेंगलुरु
इन संस्थानों ने न केवल हजारों वैज्ञानिकों को दिशा दी, बल्कि भारत को वैश्विक वैज्ञानिक शक्ति बनाने की नींव रखी।
डॉ. रमन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।
उनकी कहानी बताती है कि
बड़े सपने देखने का साहस जरूरी है,
जिज्ञासा ही खोजों की जननी है,
चुनौतियाँ सफलता के रास्ते में पड़ने वाले पत्थर मात्र हैं,
मेहनत और ईमानदारी कभी व्यर्थ नहीं जाती,
भारत के युवाओं को विज्ञान और अनुसंधान की ओर प्रेरित करने में रमन का योगदान अविस्मरणीय है।
आज जब भारत अंतरिक्ष, क्वांटम टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंसेज, एआई, और नैनोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, तब रमन की खोजें और उनकी सोच और भी प्रासंगिक हो जाती है।
वे संदेश देते हैं कि वैज्ञानिक चिंतन ही प्रगति का मार्ग है।
डॉ. सी. वी. रमन का जीवन सिर्फ एक वैज्ञानिक की कहानी नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, इच्छा-शक्ति और देशभक्ति का अद्भुत उदाहरण है।
उनकी पुण्यतिथि पर यूथ इंडिया परिवार नमन करते हुए यह संकल्प लेता है कि भारतीय विज्ञान को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए हम निरंतर प्रेरणा लेते रहेंगे।






