लखनऊ| ब्रिटेन में रहने वाले आज़मगढ़ के मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खां के वेतन वृद्धि, पेंशन और अन्य भुगतानों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। यूपी एटीएस की जांच में खुलासा हुआ कि मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत अशरफिया मुबारकपुर, आज़मगढ़ में सहायक अध्यापक आलिया पद पर नियुक्त शमशुल हुदा 2007 से ब्रिटेन में रह रहा था और 19 दिसंबर 2013 को उसने ब्रिटिश नागरिकता भी हासिल कर ली थी। इसके बावजूद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने 2007 से 2017 तक उसकी सेवा पुस्तिका की जांच किए बिना हर वर्ष वेतन वृद्धि दी। इतना ही नहीं, 1 अगस्त 2017 से उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देकर पेंशन भी मंजूर कर दी गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि शमशुल ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद कई देशों में यात्रा करते हुए इस्लाम धर्म का प्रचार कर रहा था। यूपी में उसे नियम विरुद्ध वेतन, चिकित्सा अवकाश और अन्य भुगतानों के लिए मदरसे के प्रबंधक, प्रधानाचार्य के साथ ही उस दौरान आज़मगढ़ में तैनात रहे तीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों—लालमन, प्रभात कुमार और साहित्य निकत सिंह—को जिम्मेदार ठहराया गया है। शासन को इन अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट भेज दी गई है। वर्तमान में ये क्रमशः बरेली, अमेठी और गाजियाबाद में डीएमओ के पद पर नियुक्त हैं, और इन पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
इसके अलावा शमशुल की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की फाइल और जीपीएफ भुगतान में हस्ताक्षर करने वाले अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय के अधिकारी भी जांच के दायरे में आ गए हैं। हालांकि इन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, इसलिए उनके नाम उजागर नहीं किए गए हैं।






