शरद कटियार
– लोकतंत्र की रीढ़ मानी जाने वाली प्रेस आज भी समाज के हर कोने तक सच पहुँचाने की सबसे मजबूत ताकत
हर वर्ष 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय प्रेस परिषद् की स्थापना का प्रतीक है और पत्रकारिता की स्वतंत्रता, ईमानदारी एवं निष्पक्षता को याद करने का अवसर भी। प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है, क्योंकि यह सत्ता पर प्रश्न उठाने, जनता की आवाज़ बुलंद करने और सच को उजागर करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
आज का दिन सिर्फ एक तिथि नहीं—यह उस जज़्बे का उत्सव है जिसे पत्रकारिता कहा जाता है। वह जज़्बा, जहाँ न दबाव चलता है, न प्रलोभन; सिर्फ चलता है—सच।
पत्रकार सिर्फ खबरें नहीं लिखते, वे समाज की नब्ज़ को पढ़ते हैं।
कहीं कोई अन्याय हो रहा हो, कहीं प्रशासन की लापरवाही उजागर होनी हो, कहीं जनता की आवाज़ को मंच चाहिए हो—पत्रकार सबसे पहले खड़ा होता है।
चाहे प्राकृतिक आपदाएँ हों, राजनीतिक उठापटक हो, या आम जन की परेशानियाँ—प्रेस हमेशा सबसे आगे रहा है।
डिजिटल युग में पत्रकारिता की चमक के साथ-साथ चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं।
फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं के बीच सत्य की पहचान कठिन हो रही है।
कई पत्रकार आज भी जान जोखिम में डाल कर रिपोर्टिंग करते हैं।
सत्ता, संगठनों और दबाव समूहों की ओर से चुनौतियाँ बढ़ी हैं।
आर्थिक और संस्थागत दबाव कई बार स्वतंत्र पत्रकारिता को प्रभावित करते हैं।
फिर भी, पत्रकारिता का लक्ष्य वही है,“जनता को वही सच देना, जिसकी उन्हें जरूरत है।”
एक देश तब मजबूत होता है जब उसकी आवाज़ स्वतंत्र हो।
पत्रकारिता जनता और सरकार के बीच संवाद की वह कड़ी है जो व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और जागरूक बनाती है।
स्वतंत्र प्रेस के बिना किसी लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती।
यह दिन हर उस पत्रकार का सम्मान है जो दबावों के बावजूद सच लिखता है।
हर उस संवाददाता का सम्मान है जो खेत–खलिहान से लेकर बड़े शहरों तक जनता की सच्चाई दुनिया तक पहुँचाता है।
हर उस फोटो–वीडियोग्राफर का सम्मान है जो जोखिम के बीच भी तस्वीरों के ज़रिये कहानी कहता है।
आज हम उन सभी पत्रकारों को सलाम करते हैं जो अपनी कलम की ताकत से समाज को जागरूक और मजबूत बनाते हैं।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस हमें याद दिलाता है कि पत्रकारिता सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है।
सत्य, साहस और निष्पक्षता—यही पत्रकारिता की असली पहचान है।
इस अवसर पर एक ही संकल्प—
सत्य को कभी कमज़ोर न होने दें, और पत्रकारिता की लौ को हमेशा जलाए रखें।






