एसपी को सक्षम अधिकारी से जांच कराने के निर्देश
हरदोई| मानसिक रूप से कमजोर मूकबधिर किशोरी से दुष्कर्म के मामले में पुलिस विवेचना की लापरवाही पर अदालत सख्त हो गई है। स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के अपर जिला जज अवकाश पर थे, इसलिए मामले की सुनवाई अपर जिला जज कोर्ट संख्या चार यशपाल ने की। जज ने देहात कोतवाल विनोद यादव को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि पुलिस ने किशोरी के पुलिस के समक्ष बयान (धारा 180) कराए बिना ही उसे न्यायालय में बयान (धारा 183) के लिए हाजिर कर दिया, जो पूरी तरह नियम और कानून के विपरीत है।
यह मामला 3 नवंबर को देहात कोतवाली क्षेत्र की एक कॉलोनी में सामने आया था, जहां मूकबधिर किशोरी के साथ दुष्कर्म हुआ। सीओ सिटी अंकित मिश्रा की टीम ने आरोपी रोहित कश्यप को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन दस दिन बीतने के बाद भी किशोरी का धारा 183 का बयान दर्ज नहीं हो सका था। जब विवेचक कोर्ट पहुंचे तो पत्रावली में किशोरी के धारा 180 के बयान ही मौजूद नहीं थे। विवेचक ने दलील दी कि किशोरी की मां के बयान दर्ज हैं, जिस पर जज ने कहा कि यह कानूनन पर्याप्त नहीं है और नियमों को पढ़ने की सलाह दी।
अपर जिला जज ने यह भी नाराजगी जताई कि मूकबधिर पीड़िता के बयान के लिए स्पेशल एजुकेटर की व्यवस्था नहीं की गई, जबकि यह कानूनी रूप से अनिवार्य है। इतना ही नहीं, पत्रावली में किशोरी का दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी नहीं लगाया गया था, जबकि केस डायरी के पर्चा नंबर सात में स्वयं विवेचक ने लिखा है कि प्रमाण पत्र के बिना आगे की कार्रवाई संभव नहीं।
अदालत ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि विवेचक द्वारा पूछे गए प्रश्नों का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला और कई गंभीर त्रुटियाँ पाई गईं। जज ने यह भी लिखा कि बाल कल्याण समिति से स्पेशल एजुकेटर की मांग करना विधि-विरुद्ध है, क्योंकि इस मामले में समिति की कोई भूमिका नहीं बनती। एसपी से अपेक्षा की गई है कि मामले की विवेचना किसी सक्षम अधिकारी को सौंपी जाए ताकि जांच की सुचिता और विश्वसनीयता बनी रहे।




