लखनऊ। आवारा कुत्तों के बढ़ते मामलों और सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है। राज्य सरकार ने तय किया है कि प्रदेश के हर शहर में आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाए जाएंगे। इसके लिए नगर निगमों को विशेष बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद ने सोमवार को सभी नगर आयुक्तों के साथ ऑनलाइन बैठक की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में नगर आयुक्तों ने बताया कि वर्तमान में अधिकांश शहरों में पर्याप्त शेल्टर होम नहीं हैं, जिससे कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें सुरक्षित रखने में दिक्कत होती है।
प्रमुख सचिव ने आश्वासन दिया कि शासन स्तर पर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है और नगर निगमों को नए शेल्टर होम बनाने के लिए आवश्यक धनराशि जल्द जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की जाएगी, ताकि सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को व्यवस्थित रूप से हटाया जा सके।
नगर निगम के पशुधन अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज ने बताया कि फिलहाल शहर में केवल एक शेल्टर होम है, जिसमें सीमित संख्या में ही कुत्तों को रखा जा सकता है। हजारों कुत्तों को पकड़कर रखना संभव नहीं है। नई गाइडलाइन और बजट जारी होने तक पूर्व व्यवस्था के अनुसार नसबंदी (वधियाकरण) का कार्य जारी रहेगा। शासन से बजट मिलने के बाद शेल्टर होमों का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि सरकारी और निजी अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया था कि इन कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कराकर उन्हें शेल्टर होम में रखा जाए।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे और एक्सप्रेसवे से आवारा जानवरों और मवेशियों को भी हटाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि इन आदेशों का सख़्ती से पालन होना चाहिए।
दरअसल, यह मामला उस समय चर्चा में आया जब दिल्ली में 6 साल की बच्ची की मौत आवारा कुत्तों के हमले में हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इस पर गहरी चिंता जताई थी और राज्यों को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
अब यूपी सरकार ने इस आदेश पर तुरंत अमल शुरू कर दिया है, जिससे न केवल जनसुरक्षा बढ़ेगी बल्कि पशु कल्याण की दिशा में भी ठोस सुधार देखने को मिलेंगे।




