लखनऊ। हसनगंज पुलिस ने सोमवार रात लखनऊ विश्वविद्यालय के लाल बहादुर शास्त्री छात्रावास से पीएचडी के छात्र अमन दुबे को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में हंगामा मच गया। छात्रावास में रहने वाले अन्य छात्रों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में हॉस्टल से बाहर निकल आए और लविवि पुलिस चौकी के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देर रात करीब 1:40 बजे पुलिस द्वारा अमन दुबे को रिहा किए जाने के बाद ही मामला शांत हुआ।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि बिना किसी लिखित शिकायत और विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के छात्रावास से छात्र को उठाया गया, जो पूरी तरह गलत है। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की कार्रवाई दोहराई गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अमन दुबे के खिलाफ पहले से मामला दर्ज था। दरअसल, 13 सितंबर को लविवि के राजनीति विज्ञान विभाग में अमन दुबे और रिशेंद्र प्रताप सिंह के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद अमन और उसके साथियों ने हनुमान सेतु पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान यातायात बाधित होने पर चौकी प्रभारी शिशिर कुमार ने अमन समेत 30 से अधिक छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
सोमवार को एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसर के गेट नंबर-3 के पास दोनों गुट आमने-सामने आ गए और मारपीट हुई। पुलिस ने मौके से कई छात्रों को हिरासत में लिया। इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार के मुताबिक, सोमवार को हुई झड़प के बाद दूसरे पक्ष की तहरीर पर अमन दुबे को हिरासत में लिया गया था।
गौरतलब है कि अगस्त में भी अमन दुबे पर एक दर्जन से अधिक युवकों ने लाठी-डंडे और रॉड से हमला किया था, जिसमें पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
प्रॉक्टर राकेश द्विवेदी ने बताया कि अमन दुबे को हिरासत में लेने की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को देर रात मिली। पुलिस ने इस संबंध में पूर्व सूचना नहीं दी थी। रात में एसीपी अंकित कुमार के पहुंचने पर छात्रों से वार्ता हुई और लगातार प्रयास के बाद अमन दुबे की रिहाई के बाद छात्रों का धरना समाप्त हुआ।




