35 से ज्यादा अनुदानित मदरसे मदरसा नियमावली-2016 के मानकों पर फेल, बोर्ड ने जारी किए नोटिस

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई अनुदानित मदरसों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की योग्यता पर सवाल उठे हैं। मदरसा नियमावली-2016 के मानकों पर खरे न उतरने पर मदरसा शिक्षा परिषद ने 35 से अधिक मदरसों को नोटिस जारी किया है। जांच में पाया गया कि कई जिलों के मदरसों में शिक्षक अयोग्य, भवन अधूरे और शिक्षक-छात्र अनुपात असंतुलित है।

राज्य में कुल 558 अनुदानित मदरसे हैं। पिछले साल 1 दिसंबर 2023 को सभी जिलों के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए थे। इसमें आधारभूत सुविधाएं, भवन की स्थिति, शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की योग्यता, छात्र-शिक्षक अनुपात सहित कई बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद मदरसा बोर्ड ने नियमों का पालन न करने वाले मदरसों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने बताया कि गाजीपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर और देवरिया समेत कई जिलों के मदरसों को नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि मदरसा चश्मये रहमत ओरियंटल कॉलेज (गाजीपुर) में प्रधानाचार्य और सात शिक्षकों की योग्यता अपूर्ण पाई गई है। मदरसा बुखारिया फरीदिया फखनपुर, दारुल उलूम कादरिया दाएरा शाह अहमद, दारुल उलूम अहले सुन्नत गौसिया मस्तान बाग बारा और जामिया करीमिया करीमपुरा में भी शिक्षकों की योग्यता संदिग्ध पाई गई है।
मिर्जापुर के मदरसा गौसिया इस्लामिया बेगपुर में शिक्षक-छात्र अनुपात मानक के विपरीत मिला, साथ ही प्रधानाचार्य, चार शिक्षक और एक लिपिक शैक्षिक रूप से अयोग्य पाए गए।

शिक्षक संगठनों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

मदरसा शिक्षकों के संगठन ऑल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया के महासचिव वहीदउल्लाह खान सईदी ने इस कार्रवाई को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि अधिकतर शिक्षकों की नियुक्ति मदरसा सेवा नियमावली-1987 के मानकों पर हुई थी, इसलिए उनकी योग्यता का मूल्यांकन उसी आधार पर किया जाना चाहिए।
मदरसा बोर्ड के पूर्व सदस्य हाजी दीवान साहेब जमां ने भी कहा कि 2015 के बाद कोई नया मदरसा अनुदान सूची में नहीं जोड़ा गया है, ऐसे में नियमावली-2016 के आधार पर जांच अन्यायपूर्ण है।

रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने स्पष्ट किया कि जांच में कई तरह की कमियां मिली हैं और सभी मदरसों को अपना पक्ष रखने के लिए बोर्ड कार्यालय में बुलाया गया था, मगर उच्च न्यायालय में मामलों की अधिकता के कारण सुनवाई की तिथियां फिलहाल निरस्त कर दी गई हैं। परीक्षण पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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