वंदे मातरम पर बोले सांसद, गीत में हमारे मजहब के खिलाफ शब्द, गाने के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता

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संभल। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर उठे सवाल पर संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम में हमारे मजहब के खिलाफ शब्द हैं, इसलिए हम इसे नहीं गाएंगे।” सांसद ने कहा कि वे राष्ट्रगान का पूरा सम्मान करते हैं और उसका गान भी करते हैं, लेकिन वंदे मातरम कोई राष्ट्रगान नहीं बल्कि एक गीत है।

दीपा सराय स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए बर्क ने कहा, “किसी को भी वंदे मातरम गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हमारा मजहब सिर्फ एक अल्लाह की इबादत की इजाजत देता है, इसलिए हम किसी और के सामने सजदा नहीं कर सकते।”

उन्होंने अपने बयान के समर्थन में 1986 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट किया था कि किसी को वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि सांसद जियाउर्रहमान बर्क के दादा डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने भी संसद सदस्य रहते हुए वंदे मातरम का विरोध किया था और सदन से बाहर चले गए थे। अब उनके पौत्र ने भी उसी विचार को दोहराया है, जिससे एक बार फिर वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

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