सीएमएस ने की जांच, डॉक्टर प्रवीण कुमार को जारी किया चेतावनी पत्र, डॉ प्रवीण कुमार नहीं कर पाएंगे पैथोलॉजी लैब में हस्तक्षेप
फर्रुखाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में बीते दिनों पैथोलॉजी लैब में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब ब्लड सैंपल कक्ष में डाटा एंट्री ऑपरेटर उदय सिंह द्वारा मरीजों के पर्चे छोड़कर स्वयं के तीन पर्चे पहले चढ़ाने की शिकायत मिली। इस पर लाइन में लगी एक महिला ने कड़ा विरोध जताते हुए वहां हंगामा कर दिया।
विवाद बढ़ने पर एक व्यक्ति ने मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. जगमोहन शर्मा से की। सीएमएस मौके पर पहुंचे और जांच की तो पाया कि डाटा एंट्री ऑपरेटर उदय सिंह का कोई औपचारिक नियुक्ति पत्र या लैब इंचार्ज के पास स्वीकृति पत्र नहीं था। वह बिना किसी अनुमति के वहां बैठकर मनमाने ढंग से कार्य कर रहा था।
जांच के दौरान मामला और बढ़ गया जब ओपीडी में कार्यरत चिकित्सक डॉ. प्रवीण कुमार ने विवाद में हस्तक्षेप किया और डाटा एंट्री ऑपरेटर के समर्थन में उतर आए। उनके साथ अस्पताल के कुछ अन्य कर्मचारी भी खड़े हो गए। मगर जब जांच में सच्चाई सामने आई तो स्थिति उनके खिलाफ होती दिखी।
अपने बचाव में डॉ. प्रवीण कुमार ने पैथोलॉजी लैब इंचार्ज डॉ. अमृता सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें बलात्कार के मामले में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी है।
मामले की विस्तृत जांच के बाद सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने डॉ. प्रवीण कुमार को चेतावनी पत्र जारी किया। पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि डॉ. प्रवीण, जो कि माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं, वे पैथोलॉजी लैब के कार्यों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगे, न ही किसी कर्मचारी पर व्यक्तिगत आरोप लगाएंगे। यदि भविष्य में ऐसा दोबारा हुआ तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं उनकी होगी।
सूत्रों के अनुसार, लोहिया अस्पताल में इस तरह की अव्यवस्थाएं और अनधिकृत कार्य पहले भी सामने आ चुके हैं। कई बार कर्मचारी अपने प्रभाव के चलते नियमों को दरकिनार कर कार्य करते हैं, जिसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है।
अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि इस पूरे प्रकरण की पूर्ण जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाएगी, ताकि आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।





