आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर झपकी बनी हादसों की सबसे बड़ी वजह, 57 महीनों में 7024 दुर्घटनाएं

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लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक में पेश किए गए आंकड़ों ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की भयावह सच्चाई उजागर की है। पिछले 57 महीनों (जनवरी 2021 से सितंबर 2025) के दौरान इस एक्सप्रेसवे पर कुल 7024 सड़क हादसे दर्ज हुए हैं। यानी औसतन हर महीने 123 दुर्घटनाएं हुईं। यूपीईडा द्वारा प्रस्तुत यह रिपोर्ट अधिवक्ता केसी जैन ने कमेटी की बैठक में रखी, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति अभय मनोहर सपरे ने की।

रिपोर्ट में बताया गया कि कुल हादसों में से 3843 दुर्घटनाएं केवल वाहन चालकों की झपकी या नींद आने के कारण हुईं, जो कुल घटनाओं का 54.71 प्रतिशत है। इसके अलावा 690 हादसे (9.82%) ओवर स्पीडिंग, 626 हादसे (8.91%) टायर फटने, और 249 हादसे (3.54%) जानवरों के कारण हुए। अन्य कारणों से 1616 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।

आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 में एक्सप्रेसवे पर चलने वाले कुल वाहनों में 64.29 प्रतिशत कारें थीं। इसी वजह से 2021 से सितंबर 2025 के बीच हुई कुल दुर्घटनाओं में 3881 हादसे केवल कारों से संबंधित रहे, जिनमें 4264 लोग घायल और 369 की मौत हुई।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ट्रैफिक नियमों की सबसे अधिक अनदेखी दोपहिया चालकों द्वारा की जाती है। इस अवधि में दोपहिया वाहनों से जुड़े 769 हादसों में 1053 लोग घायल हुए और 133 की मौत हुई।

अधिवक्ता केसी जैन ने सुझाव दिया कि जब कोहरा घना होता है, तब एक्सप्रेसवे पर कारों की गति सीमा 120 से घटाकर 75 किमी प्रति घंटा कर दी जानी चाहिए, जैसा कि यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले से लागू है।

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