न्याय की राह के दो प्रहरी : वकील और पुलिस ही हैं कानून की असली ताकत

0
91

शरद कटियार

कानून की व्यवस्था किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की रीढ़ होती है। भारत जैसे विशाल और विविधता भरे देश में यह जिम्मेदारी दो प्रमुख स्तंभों पर टिकी है वकील और पुलिस। एक अपराध की जड़ तक पहुंचकर उसे उजागर करता है, दूसरा अदालत में उस अपराध का न्याय सुनिश्चित करता है। दोनों का लक्ष्य एक ही है न्याय की स्थापना और समाज में कानून के प्रति विश्वास कायम रखना।
लेकिन आज विडंबना यह है कि अक्सर ये दोनों वर्ग, जो न्याय के साझीदार हैं, आमने सामने खड़े दिखाई देते हैं। कहीं थाने के बाहर बहस, तो कहीं अदालत परिसर में झड़प ऐसे दृश्य जनता के मन में न्याय व्यवस्था को लेकर शंका पैदा करते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि वकील और पुलिस दोनों ही उसी प्रणाली के अंग हैं, जिसका उद्देश्य समाज में शांति, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना है।वकील अदालत में कानून की आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है। उसकी दलीलें न केवल किसी मुवक्किल का बचाव करती हैं, बल्कि यह सुनिश्चित करती हैं कि कानून की गरिमा बनी रहे। एक सच्चा अधिवक्ता वही होता है जो न्याय को सर्वोपरि मानकर काम करे न कि केवल केस जीतने के लिए।
दूसरी ओर पुलिस वह संस्था है जो न्याय की पहली सीढ़ी है। अपराध की सूचना से लेकर जांच और साक्ष्य जुटाने तक उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जनता का पुलिस पर विश्वास तभी मजबूत होता है जब वह निष्पक्षता और संवेदनशीलता से कार्य करे। लेकिन जब पुलिस अधिकारों का दुरुपयोग करती है या अत्याचार के आरोप लगते हैं, तो यही भरोसा कमजोर पड़ जाता है।वकील और पुलिस, दोनों ही समाज के प्रति जवाबदेह हैं। यदि इनमें पारस्परिक सम्मान और सहयोग की भावना बनी रहे, तो न्याय की प्रक्रिया और भी सशक्त होगी। परस्पर टकराव न केवल इन दोनों वर्गों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि न्याय व्यवस्था की जड़ों को भी हिलाता है।
इसलिए आवश्यक है कि दोनों वर्ग एक दूसरे की भूमिका को समझें, संवाद बढ़ाएं और मिलकर उस प्रणाली को मजबूत करें जो जनता के अधिकारों की रक्षा करती है। न्याय तभी संभव है जब उसकी हर कड़ी पुलिस से लेकर अदालत तक विश्वास, ईमानदारी और संतुलन से जुड़ी हो।आज जरूरत है कि वकील और पुलिस यह समझें कि वे विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं एक ही न्याय की लड़ाई के दो पहिए है। जब दोनों अपने कर्तव्यों को ईमानदारी और संयम से निभाएंगे, तभी देश में न्याय का सच्चा सूर्योदय होगा।

लेखक दैनिक यूथ इंडिया के प्रधान संपादक है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here