चंडीगढ़ / नई दिल्ली ब्यूरो रिपोर्ट
हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की 7 अक्टूबर को हुई संदिग्ध आत्महत्या के बाद पूरा देश न्याय की मांग में एकजुट होता दिख रहा है। अब इस मामले में भीम आर्मी प्रमुख और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने इस घटना को “जातीय भेदभाव और संस्थागत साजिश का परिणाम” बताते हुए हरियाणा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
“यह कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि कानून को ताक पर रखकर रची गई साजिश”
चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि 7 अक्टूबर को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार ने जातीय भेदभाव और निरंतर मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर खुद को गोली मार ली थी। उन्होंने कहा कि 11 अक्टूबर को वे चंडीगढ़ में दिवंगत आईपीएस के परिवार से मिले, जहाँ परिवार ने कई दस्तावेज और साक्ष्य दिखाए।
उनके अनुसार, “यह कोई साधारण आत्महत्या नहीं है। यह एक सोची-समझी साजिश है जिसमें एक ईमानदार दलित अधिकारी को झूठे आरोपों में फंसाकर उसकी गरिमा छीन ली गई। न जांच में नियमों का पालन हुआ, न न्याय की मंशा दिखी। बल्कि झूठे गवाह तैयार किए गए ताकि उन्हें भ्रष्ट साबित किया जा सके।”
चंद्रशेखर ने कहा कि एक सच्चे, ईमानदार अफसर को इतने झूठे आरोपों और जातिगत उत्पीड़न से तोड़ा गया कि उन्होंने सम्मान की रक्षा में अपनी जान कुर्बान कर दी।
14 अक्टूबर तक घटना को पूरा एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन परिवार ने अब तक आईपीएस अधिकारी के शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है।
परिवार का कहना है कि जब तक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं होती, वे अपने प्रियजन को अंतिम विदाई नहीं देंगे।
चंद्रशेखर ने कहा, “यह परिवार न्याय की प्रतीक्षा में बैठा है। उनकी वेदना किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है जहाँ सच्चाई बोलने वालों को दबा दिया जाता है।”
वाई. पूरन कुमार की मौत के बाद दलित समाज, सामाजिक संगठनों और प्रशासनिक सेवा से जुड़े प्रतिनिधियों ने एक बड़ी महापंचायत बुलाई थी। इस पंचायत में सर्वसम्मति से हरियाणा सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था कि मामले की न्यायिक जांच कर दोषियों को गिरफ्तार किया जाए।
परंतु 24 घंटे बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस पर चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा “जब राज्य में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को भी न्याय नहीं मिल पा रहा, तो एक आम पुलिसकर्मी या नागरिक कैसे भरोसा करेगा कि व्यवस्था उसके साथ न्याय करेगी? यह हर ईमानदार अफसर के आत्मसम्मान और सुरक्षा का प्रश्न है।”
चंद्रशेखर आज़ाद ने एलान किया है कि यदि अगले 24 घंटे में न्याय की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर चंडीगढ़ कूच करेंगे।
उन्होंने कहा, “महापंचायत द्वारा दिए गए 48 घंटे पूरे होते ही हम सड़क पर उतरेंगे। यह सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश के दलित समाज और हर ईमानदार सरकारी अधिकारी की लड़ाई है।”
चंद्रशेखर ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से कहा कि सरकार तत्काल इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायिक जांच कराए। “वाई. पूरन कुमार जी का बलिदान हमें याद दिलाता है कि सत्य बोलना इस सिस्टम में अपराध माना जाता है। यह अब रुकना चाहिए। सरकार को दलित अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए ठोस नीति बनानी होगी।”
इस घटना के बाद हरियाणा समेत कई राज्यों में दलित समाज के भीतर आक्रोश गहराता जा रहा है। पुलिस विभाग के कई अधिकारियों ने भी अनौपचारिक रूप से कहा कि “अगर वाई. पूरन कुमार जैसे वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षित नहीं हैं, तो बाकी अफसरों का मनोबल कैसे बना रहेगा
“यह केवल एक अधिकारी की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की आत्मा की हत्या है।”





