लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) ने आगामी पंचायत चुनावों को लेकर नई राजनीतिक रणनीति तैयार की है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सपा ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के पदों पर अपने आधिकारिक प्रत्याशी नहीं उतारेगी।
इस निर्णय के पीछे वजह यह बताई जा रही है कि कई स्थानों पर पार्टी के अपने कार्यकर्ता एक ही पद के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं। ऐसे में किसी एक को आधिकारिक समर्थन देने से आगामी विधानसभा चुनाव में असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है। पार्टी का मानना है कि जो कार्यकर्ता इन पदों पर जीत हासिल करेंगे, उन्हें बाद में ब्लॉक प्रमुख या जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए रणनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, इस रणनीति का औपचारिक ऐलान सपा की ओर से अभी नहीं किया गया है
इसी बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा नेता आकाश आनंद को लेकर तीखी टिप्पणी की है, जिसे पार्टी की बदली हुई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि “भाजपा और बसपा के बीच अंदरूनी सांठगांठ है। आकाश आनंद की जरूरत भाजपा को ज्यादा है।”
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अखिलेश यादव का यह बयान सपा की उस नई नीति की झलक है, जिसके तहत पार्टी अब बसपा पर सीधे हमले से परहेज़ नहीं करेगी। यह भी माना जा रहा है कि सपा अब 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर दलित वोट बैंक को साधने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
सपा समझती है कि सत्ता तक पहुंचने के लिए दलित मतदाताओं का समर्थन अहम है। पिछले कुछ चुनावों में भाजपा ने बसपा के पारंपरिक दलित वोट बैंक में सेंध लगाई थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने इस वर्ग में अपनी पैठ बढ़ाई।
अखिलेश यादव ने हाल ही में पार्टी नेताओं को निर्देश दिए हैं कि दलितों से जुड़े अत्याचार के मामलों को प्रमुखता से उठाया जाए और उनके बीच उपस्थिति दर्ज कराई जाए। रायबरेली में वाल्मीकि युवक की हत्या पर सपा का मुखर रुख इसी नीति का उदाहरण माना जा रहा है।
हालांकि, अखिलेश यादव के आकाश आनंद पर किए गए तंज का अब तक किसी प्रमुख भाजपा नेता की ओर से जवाब नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि सपा की यह “साइलेंट स्ट्राइक” रणनीति पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक असर दिखा सकती है।





