नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के वसंतकुंज में 17 छात्राओं से यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार स्वामी चैतन्यानंद उर्फ पार्थ सारथी की असलियत अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। पुलिस पूछताछ में आरोपी न सिर्फ टालमटोल कर रहा है, बल्कि झूठ पर झूठ बोलकर जांच को भटकाने की कोशिश कर रहा है। आरोपी बाबा को न अपने किए पर कोई पछतावा है, न ही शर्म।
दिल्ली पुलिस की जांच में बाबा के मोबाइल फोन से कई युवतियों के साथ अश्लील चैट्स, एयरहोस्टेस के साथ तस्वीरें और युवतियों की डीपी के स्क्रीनशॉट मिले हैं। वह लड़कियों को झांसा देकर फंसाने और प्रलोभन देने की कोशिश करता था। पुलिस ने उसकी दो महिला सहयोगियों को हिरासत में लेकर आमना-सामना कराया है, जिससे कई खुलासे हुए हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपी पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा और बार-बार सवालों के गोलमोल जवाब दे रहा है। जब पुलिस ने सबूतों के साथ दबाव बनाया, तब जाकर वह कुछ सवालों के जवाब देने लगा।
लॉकअप में आरोपी की पहली रात बेहद बेचैनी में गुजरी। उसने फर्राटेदार अंग्रेजी में पुलिस से गुहार लगाई कि उसे आम आरोपियों के साथ न रखा जाए। खुद को “व्रती” बताते हुए फलाहार की मांग की, जिसे पुलिस ने सीमित रूप से स्वीकार किया। उसे सांवा की खीर और फल दिए गए।
जांच में पता चला है कि आरोपी बाबा का असली नाम पार्थ सारथी है और वह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी का रहने वाला है। प्रारंभ में उसने खुद को ओडिशा का बताया था। उसके पास दो पासपोर्ट होने की बात भी सामने आई है, जिसकी जांच चल रही है। आरोपी ने विदेश में शिक्षा प्राप्त करने का दावा किया था, लेकिन अब तक उस दावे की पुष्टि नहीं हो पाई है।
धार्मिक संस्था की आड़ में चल रहे इस गंदे खेल ने कई मासूम छात्राओं की जिंदगी को प्रभावित किया है। पुलिस अब डिजिटल सबूतों, पीड़ितों के बयान और आरोपी के नेटवर्क की जांच में जुटी है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि धर्म के नाम पर ऐसे ढोंगी कैसे समाज को गुमराह कर रहे हैं और मासूमों के भविष्य से खेल रहे हैं। दिल्ली पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे संभव हैं।




