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Wednesday, April 15, 2026

दहेज हत्या में पति को दस साल कारावास, साक्ष्य न मिलने पर सास-ससुर बरी

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विशेष न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, 12 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया

फर्रुखाबाद: दहेज हत्या (dowry death) के मामले में विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट तरुण कुमार सिंह की अदालत ने पति दिलीप कुमार उर्फ विजय को दोषी करार देते हुए दस वर्ष के कारावास और 12 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना न देने पर अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, साक्ष्य के अभाव में सास और ससुर को दोषमुक्त कर दिया गया।

मामला थाना कमालगंज क्षेत्र के गांव गदनापुर से जुड़ा है। जनपद कन्नौज के सैंगरमऊ निवासी चंद्रशेखर ने 5 अप्रैल 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी भतीजी चित्रा की शादी 18 जुलाई 2010 को दिलीप कुमार उर्फ विजय पुत्र सतीश चंद्र के साथ की थी। शादी के बाद से ही ससुरालीजन मोटरसाइकिल और 50 हजार रुपये नगद की मांग को लेकर चित्रा का उत्पीड़न करने लगे।

चंद्रशेखर के अनुसार, 4 अप्रैल 2011 की रात को उनके बहनोई महेंद्र ने सूचना दी कि चित्रा की दहेज के लिए हत्या कर दी गई है। इस मामले में पति दिलीप कुमार के साथ सास माया देवी उर्फ गीता और ससुर सतीश चंद्र को भी नामजद किया गया था। पुलिस ने तीनों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। लंबी सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर पति दिलीप कुमार को दोषी मानते हुए सजा सुनाई, जबकि साक्ष्य न मिलने पर सास माया देवी और ससुर सतीश चंद्र को बरी कर दिया गया।

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