सीतापुर। बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अखिलेश प्रताप सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। सरकार ने उनकी करतूत पर संज्ञान लेते हुए निलंबन की तैयारी शुरू कर दी है। मामला उस समय खुला जब उनका एक वायरल ऑडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने प्रभाव में एक महिला शिक्षिका को बिना स्कूल आए हाजिरी दर्ज करने का दबाव बनाया था।
जानकारी के मुताबिक, सीतापुर जिले के एक विद्यालय में कार्यरत प्रधानाध्यापक बृजेंद्र वर्मा को बीएसए लगातार यह निर्देश दे रहे थे कि उनकी पसंदीदा महिला शिक्षिका स्कूल न आए, लेकिन उसकी हाजिरी नियमित रूप से दर्ज होती रहे। प्रधानाध्यापक ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया और साफ कहा कि यह नियमों और सेवा शर्तों के खिलाफ है।
प्रधानाध्यापक के इनकार के बाद बीएसए ने कथित रूप से उनका उत्पीड़न शुरू कर दिया। प्रताड़ना से तंग आकर बृजेंद्र वर्मा ने एक दिन आपा खो दिया और उन्होंने बीएसए को बेल्ट से पीट दिया। इसके बाद पुलिस ने प्रधानाध्यापक को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
घटना के बाद जब बीएसए और प्रधानाध्यापक के बीच की बातचीत का ऑडियो सामने आया तो उनकी गैरकानूनी मांग और मनमानी उजागर हो गई। इस ऑडियो ने यह साबित कर दिया कि बीएसए ने महिला शिक्षिका की गैर-हाजिरी छिपाने के लिए दबाव बनाया था।
इस मामले के उजागर होते ही शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। सूत्र बताते हैं कि शासन स्तर पर बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई लगभग तय है। विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है और उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण की निगरानी कर रहे हैं।
यह प्रकरण शिक्षा विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के शीर्ष शिक्षा अधिकारी की इस तरह की करतूतें सिस्टम पर अविश्वास पैदा करती हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस मामले में कितनी कड़ी कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




