राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बांके बिहारी मंदिर में किए दर्शन, मथुरा वृंदावन में सुरक्षा और आस्था का संगम

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मथुरा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज प्रातः अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वृंदावन रोड रेलवे स्टेशन पहुंचीं, जहां पारंपरिक शहनाई की मधुर धुन और स्थानीय रस्मों-रिवाज के साथ उनका स्वागत किया गया। स्टेशन से राष्ट्रपति का काफिला सीधे बांके बिहारी मंदिर की ओर बढ़ा, जहां उन्होंने पूरे विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। राष्ट्रपति अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंचीं, जिनमें उनकी बेटी, दामाद और नाती-पोते भी शामिल रहे। लगभग आधे घंटे तक विशेष पूजा-अर्चना और आरती चली। इस दौरान उन्होंने देहरी पूजन और श्रृंगार अर्पण किया। इसके बाद वे निधिवनराज मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने करीब आधे घंटे तक रुककर 500 मीटर की परिक्रमा की और आशीर्वाद लिया। राष्ट्रपति परिवार सहित बंशी चोर राधा रानी मंदिर और हरिदास जी के मंदिर भी गईं, जहां श्रृंगार भेंट अर्पित कर दर्शन किए। राष्ट्रपति के स्वागत के लिए बांके बिहारी मंदिर को देशी-विदेशी फूलों से सजाया गया था। मंदिर सेवायतों और गोस्वामी परिवार के सदस्यों ने पूरे रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना कराई। इस दौरान कन्नौज से मंगाए गए इत्र से देहरी पूजन किया गया और श्रीकुंज बिहारी अष्टक का पाठ भी हुआ। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए थे। पीएसी, एलआईयू, सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात रही। मंदिर मार्ग पर स्थित घरों के दरवाजे एहतियातन बंद कराए गए और गलियों में किसी को आवाजाही की अनुमति नहीं दी गई। सुरक्षा का ऐसा घेरा बनाया गया कि परिंदा भी पर न मार सके। यहां तक कि बंदरों की शरारत रोकने के लिए वन विभाग की टीमें गुलेल और एयरगन लेकर छतों पर तैनात रही। राष्ट्रपति के काफिले को सुचारु रूप से गुजराने के लिए वृंदावन और मथुरा के कुल 47 मार्गों पर यातायात प्रतिबंध लागू किया गया। वृंदावन में 24 और मथुरा में 23 मार्ग सुबह सात बजे से ही बंद कर दिए गए थे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी न रह सके। राष्ट्रपति मुर्मू ने दर्शन के बाद कहा कि वे स्वयं को बेहद धन्य महसूस कर रही हैं। उनके इस धार्मिक दौरे ने न केवल मथुरा-वृंदावन की आस्था को नई ऊर्जा दी, बल्कि प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा प्रबंधन का भी अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह दौरा श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहा, जहां धार्मिक भावनाओं की पवित्रता और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम एक साथ दिखाई दिए।

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