लखनऊ प्रदेश में बाढ़ का कहर लगातार गहराता जा रहा है। पहाड़ी राज्यों में हो रही भारी बारिश के बाद नदियों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है और मैदानी जिलों में तबाही का आलम देखने को मिल रहा है। प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियाँ चेतावनी बिंदु पार कर चुकी हैं। इन नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंचने से शहर और उसके आस-पास के निचले इलाके डूबने लगे हैं। कई मोहल्लों में घरों और दुकानों में पानी भर गया है। गंगा यमुना के संगम क्षेत्र में बाढ़ का पानी फैलने से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं।आगरा में यमुना नदी का जलस्तर 47 साल बाद सबसे ऊपर दर्ज किया गया है। रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी के चलते नदी का पानी तटवर्ती इलाकों में घुस गया है। ऐतिहासिक धरोहरों और मंदिरों तक पानी पहुंचने से लोगों में दहशत का माहौल है। यमुना किनारे स्थित महालक्ष्मी मंदिर की दीवार तेज़ बहाव के कारण ढह गई, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है।दूसरी ओर, औरैया, आगरा और अमरोहा, फर्रुखाबाद जिलों में बाढ़ और तेज़ बहाव की वजह से अलग अलग हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई है। औरैया में खेत की ओर जा रहे एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई। आगरा में भी तेज़ बहाव की चपेट में आकर एक युवक की जान चली गई, जबकि अमरोहा जिले में गंगा में नहाने गए व्यक्ति की डूबकर मौत हो गई। इन घटनाओं ने बाढ़ की त्रासदी को और गहरा कर दिया है।प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। पशुधन के लिए चारा और सुरक्षित ठिकानों की समस्या भी गंभीर हो गई है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है, जिससे लोगों को बाहर निकलने में मुश्किलें पेश आ रही हैं।प्रशासनिक स्तर पर राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। प्रभावित इलाकों में नावों की व्यवस्था की गई है, साथ ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अस्थायी शिविर बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी तैनात की गई हैं ताकि किसी तरह की महामारी या संक्रमण फैलने से रोका जा सके।हालांकि, नदियों के उफान और लगातार बरसात के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदियों और नालों के किनारे न जाएं और सतर्क रहें।






