– फर्म चयन न होने और सत्यापन में लापरवाही बनी वजह, डीएम ने सीडीओ से मांगी रिपोर्ट
कानपुर: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर 27 बेटियों की शादी (Marriage) तो धूमधाम से हो गई, लेकिन समाज कल्याण विभाग की लापरवाही के चलते उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल (not get the benefit of the scheme) सका। मंडप के नीचे सात फेरे लेने के बाद जब अन्य जोड़े उपहार और चेक लेकर खुशी-खुशी विदा हो रहे थे, तब ये 27 कन्याएं बिना किसी सहायता या तोहफे के मायूस होकर अपने ससुराल चली गईं।
11 मई को मोतीझील लॉन में समाज कल्याण समिति सेवा द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कुल 98 जोड़ों की शादी संपन्न हुई थी। इनमें से 27 कन्याएं मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के पात्र थीं, जिनके आवेदन कार्यक्रम से एक सप्ताह पूर्व ही जिलाधिकारी के निर्देश पर ऑनलाइन किए गए थे। संस्था के सचिव धनीराम पैंथर ने सभी औपचारिकताएं समय से पूरी कर विभाग को भेज दी थीं। बावजूद इसके समाज कल्याण विभाग ने न तो उनके आवेदन सत्यापित किए, न ही किसी प्रकार का लाभ प्रदान किया।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक लाख रुपये का लाभ प्रत्येक पात्र जोड़े को दिया जाता है, जिसमें 60 हजार रुपये का चेक, 25 हजार की उपहार सामग्री और 15 हजार रुपये आयोजन खर्च के रूप में होते हैं। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बेटियों की शादी में मदद करना है। परंतु इस मामले में विभाग की कार्यप्रणाली ने योजना की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
धनीराम पैंथर का कहना है कि उन्होंने योजना का लाभ दिलाने के लिए समाज कल्याण विभाग के कई चक्कर लगाए, लेकिन न कोई सुनवाई हुई, न ही कोई समाधान। अंततः उन्होंने जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के जनता दर्शन में अपनी बात रखी। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ दीक्षा जैन से जांच कर रिपोर्ट तलब की है।
इस बीच जुलाई में आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के जवाब में समाज कल्याण विभाग ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया गया है, और उपहार सामग्री की खरीद के लिए अभी तक किसी फर्म का चयन नहीं हो सका है।
इसलिए योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता। विभाग का यह भी कहना है कि यदि समिति चाहे तो ये आवेदन शादी अनुदान योजना के तहत कर सकती है, जिसमें पात्रता की जांच के बाद लाभ दिया जाएगा। विभाग की यह सफाई उन गरीब परिवारों के लिए संतोषजनक नहीं है, जिन्होंने योजना के भरोसे अपनी बेटियों की शादी कर दी। अब सवाल यह उठता है कि जब समय से आवेदन हुए, तो सत्यापन और फर्म चयन क्यों नहीं हुआ? क्या जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होगी, या योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी?
समिति के सचिव ने कई आवेदन ऑनलाइन कराए थे लेकिन समाज कल्याण विभाग ने सत्यापन ही नहीं कराया है। यह विभाग की लापरवाही है। इसकी जांच के लिए विभाग से जिओ मांगा गया है। दोषियों पर कार्रवाई होगी। -दीक्षा जैन, सीडीओ