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Tuesday, February 17, 2026

आतंक के पर्याय रहे माफिया अनुपम दुबे पर क़ानून का हथोड़ा चलते ही जनमानस को राहत का एहसास

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– सजातियों पर भी सालों बरसाया सितम, जुर्म और जरायम से थर्राते थे लोग
– अपने खून के रिश्तों को भी भून डाला था,गोलियों की तडतडाहत के बीच
– जातिवाद की आड़ मे भ्रम फैलाने वालों पर टेड़ी नजर

फर्रुखाबाद। कुख्यात अपराधी, माफिया अनुपम दुबे को इंस्पेक्टर हत्याकांड के बाद ठेकेदार समीम हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा मिलने से जिले के साथ-साथ पड़ोसी जनपदों के भी पीड़ित परिवारों ने राहत की सांस ली है। वर्षों तक दहशत का पर्याय बने अनुपम और उसके गैंग ने न केवल विरोधियों बल्कि अपने ही परिजनों और सजातीय समाज के लोगों पर भी खून का खेल खेला था, सजा के बाद लोगो मे सरकार और न्याय के प्रति विश्वास जागा है।

अपने ही खून के रिश्तों की हत्या

अनुपम दुबे और उसके भाई अमित उर्फ बब्बन, अनुराग दुबे डब्बन ने 2005 में जघन्य अपराध करते हुए अपने ही चाचा कौशल किशोर दुबे, लक्ष्मीकांत दुबे और चाची की गोलियों से हत्या कर दी थी। रिश्तों को दरकिनार कर किया गया यह नरसंहार उस समय जिलेभर में सनसनी का कारण बना।

बाजार में गोलियों से भूना

29 जून 2010 को फतेहगढ़ के बाजार में ब्राह्मण समाज के उभरते युवा रंजन उर्फ धर्मेंद्र शर्मा और विनय शर्मा को शाम 8 बजे गोलियों से भून दिया गया। इनकी मौत से परिवारों के चिराग बुझ गए। पीड़ित परिजनों का कहना है कि अपराधियों ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया और घर का दिया तक बुझा दिया।

कन्नौज में भी किया आतंक

अनुपम दुबे के आतंक की सीमाएं फतेहगढ़ तक ही सीमित नहीं थीं। पड़ोसी जनपद कन्नौज के सौरिख थाना क्षेत्र के चपुन्ना गांव में समाज के संभ्रांत व्यक्तियों, जिनमें मनोज अग्निहोत्री प्रमुख हैं, को जमीन कब्जा करने का विरोध करने पर झूठे मुकदमों में फंसा दिया गया। यहां तक कि उन्हें व कई लोगों को उम्रकैद तक भुगतनी पड़ी।

अधिवक्ता संजय मिश्रा को घर छोड़ने पर मजबूर किया

फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र में अधिवक्ता संजय मिश्रा का मकान भी माफिया ने कागजी हेरफेर कर कब्जा कर लिया था। कब्जे के बाद पूरे परिवार को ही जिला छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया।

सजातीय महिलाओं और युवतियों पर भी डालता रहा डाका

गैंग के सरगना अनुपम दुबे ने कई गरीब परिवारों की बेटियों को अपनी हवस का शिकार बनाया और कई परिवारों की बेटियों की शादी तक नहीं होने दी। यहां तक कि अपने सगे चाचा के बेटे अवध दुबे की जान के पीछे भी पूरा गैंग पड़ गया। अवध दुबे ने पुलिस और प्रशासन से संरक्षण पाकर किसी तरह अपनी जान बचाई।

सोशल मीडिया पर जातिवाद की आड़

आजीवन कारावास की सजा के बाद अब गैंग के समर्थक सोशल मीडिया पर जातिवाद का जहर घोलकर सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी है और कहा है कि माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
माफिया अनुपम दुबे को सजा मिलने के बाद सबसे ज्यादा खुशी उन ब्राह्मण परिवारों को हुई है, जिन्होंने वर्षों तक उसके आतंक को झेला। पीड़ितों ने कहा कि न्याय मिलने में देर जरूर हुई, लेकिन अब लगता है कि उनकी पीड़ा को अदालत ने सुना है।
अनुपम दुबे की सजा न केवल फर्रुखाबाद बल्कि पूरे प्रदेश में कानून के राज की जीत के तौर पर देखी जा रही है

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