– अधिवक्ता राजीव वाजपेई की जोरदार पैरवी पर हो सका बड़ा निर्णय
– चश्मदीद गवाह इदरीश की गवाही से मिला न्याय
– माफिया के करीवी साथी ने लगवा दिया था गवाह का फर्जी शपथपत्र
फर्रुखाबाद।
प्रदेश के चर्चित अपराधों में से एक समीम हत्याकांड में आज बड़ा फैसला आया है। जिला एवं सत्र न्यायालय फतेहगढ़ ने कुख्यात माफिया अनुपम दुबे को दोषी करार दिया है। यह मामला वर्ष 1995 का है, जब पड़ोसी जनपद कन्नौज के गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के समधन निवासी ठेकेदार समीम की हत्या फतेहगढ़ कोतवाली के मछली टोला मोहल्ले में सरे बाजार कर दी गई थी।
करीब तीन दशकों तक चले इस मुकदमे में अब अदालत ने बड़ा निर्णय सुनाया है। घटना के समय समीम की हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। हत्या के पीछे कुख्यात माफिया अनुपम दुबे और उसके साथियों का नाम सामने आया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह इदरीश की गवाही अहम साबित हुई। लेकिन इस बीच मामले को कमजोर करने के लिए माफिया के सहयोगियों ने कई हथकंडे अपनाए। चर्चा है,कि माफिया के साथी रहे नान प्रेक्टिशनर शातिर वकील अवधेश मिश्रा ने बिना अपना वकालतनामा दाखिल किए ही फर्जी शपथपत्र लगवा दिया था, जिससे मुकदमे की दिशा बदलने की कोशिश की गई। इस पूरे मामले को अधिवक्ता राजीव बाजपेई ने उजागर किया था,और अदालत में जोरदार पैरवी की।
आज फतेहगढ़ जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनवाई के बाद कुख्यात माफिया अनुपम दुबे को हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने माना कि घटना योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई थी। अब अदालत जल्द ही सजा के बिंदु पर अगली सुनवाई तय करेगी।
इस फैसले ने प्रदेश में हलचल मचा दी है। कुख्यात अपराधियों की फेहरिस्त में शामिल अनुपम दुबे लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश कर रहा था। मगर आखिरकार 28 साल बाद अदालत ने उसे दोषी ठहरा दिया।
अब सबकी निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि अनुपम दुबे को उम्रकैद मिलेगी या फिर फांसी की सजा।
28 साल पुराने समीम हत्याकांड में कुख्यात माफिया अनुपम दुबे दोषी, जल्द होगी सजा तय


