प्रशांत कटियार
उत्तर प्रदेश में खाद की किल्लत ने किसानों को सड़क पर ला दिया है। किसान खाद के लिए घंटों लाइन में खड़े होकर भी खाली हाथ लौट रहे हैं। सरकार हर रोज़ यह झूठा राग अलाप रही है कि खाद पर्याप्त है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई किसानों की पुकार और उनकी टूटी उम्मीदों में साफ झलक रही है। लखनऊ में विधानसभा घेरने पहुंचे समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने किसानों की आवाज़ उठाई, पुलिस से धक्का-मुक्की हुई और नारे लगे पर सरकार ने इसे भी सिर्फ राजनीतिक नौटंकी कहकर पल्ला झाड़ लिया। यह किसानों की पीड़ा का अपमान है। फतेहपुर जिले का हाल बेहाल है, 750 गोदामों पर दिनभर लाइन में लगने के बाद किसान को सिर्फ एक बोरी खाद मिल रही है। क्या इतने से किसान का खेत भर पाएगा,यह सरकार की नाकामी नहीं, किसानों के साथ सीधा मज़ाक है। सोनभद्र में हालत इतने बिगड़े कि पीएसी तैनात करनी पड़ी। दो हजार किसानों की भीड़ के सामने महज़ 520 बोरी खाद बांटी गई। सैकड़ों किसान खाली हाथ लौट गए, उनके खेत सूख रहे हैं और बच्चों का पेट भरने की उम्मीद टूट रही है। महराजगंज के गंडक दियारा इलाके में तो किसानों को 40 किलोमीटर दूर जाकर खाद लानी पड़ रही है और हर बोरी पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। गरीब और सीमांत किसान इस लूट को कैसे सहें, वहीं लखनऊ के बीकेटी और काकोरी में खाद वितरण में फर्जीवाड़ा खुला बिना खतौनी खाद देना, पुरानी रजिस्टर में हेराफेरी और किसानों से जबरन वसूली। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह भ्रष्टाचार का खुला खेल है।
सरकार कह रही है कि स्टॉक पर्याप्त है लेकिन किसान कह रहे हैं कि खाद नदारद है। यह विरोधाभास साबित करता है कि सच्चाई को छुपाया जा रहा है और किसानों के साथ विश्वासघात हो रहा है। अन्नदाता की यही हालत रही तो फसलें बर्बाद होंगी, खेत बंजर होंगे और किसान कर्ज और आत्महत्या की ओर धकेले जाएंगे। किसानों ने साफ कह दिया है कि उन्हें बयान नहीं, खाद चाहिए, आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए। अगर सरकार ने आंखें मूंदे रखीं तो यही किसान सड़क से सदन तक ऐसा आंदोलन छेड़ेंगे जो सत्ता की नींव हिला देगा। यह संकट सिर्फ खाद का नहीं है, यह सरकार की नीयत का संकट है। किसान अब और चुप नहीं रहेंगे यह चेतावनी है कि अगर उनकी मेहनत और भविष्य से खिलवाड़ हुआ तो यह गुस्सा बगावत में बदलेगा और फिर कोई ताकत इसे रोक नहीं पाएगी।




