फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा नदियों की बाढ़ का प्रकोप जिले में लगातार बढ़ रहा है। गंगा नदी का का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर सक्रिय हैं, लेकिन हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।गंगा का जलस्तर 137.30 मीटर तक पहुंच चुका है, जो खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर है। बही राम गंगा नदी का जल स्तर 137.05 है।जिले के 85 गांव पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं, जबकि 100 से अधिक गांव टापू जैसे हालात में घिर गए हैं। बाढ़ से करीब 23 हजार परिवार प्रभावित हुए हैं और उनकी फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3645 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आ चुकी है।यातायात भी बुरी तरह प्रभावित है। बदायूं फर्रुखाबाद मार्ग और राजेपुर चित्रकूट डिप जैसे प्रमुख रास्तों पर पानी भरने से आवागमन ठप है। कई गांवों में तो घुटनों से लेकर ढाई फीट तक पानी भरा है, जिससे ग्रामीणों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।बाढ़ ने सिर्फ इंसानों को ही नहीं बल्कि पशुओं को भी संकट में डाल दिया है। कई गांवों में चारे की भारी किल्लत हो गई है और बीमारियां फैलने का खतरा मंडरा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 300 से अधिक स्वास्थ्य शिविर लगाए हैं, जिनमें 3000 से ज्यादा मरीजों को दवाइयां दी गई हैं। बुखार, खुजली, खांसी, दस्त और संक्रमण जैसी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर स्वास्थ्य टीमों की निगरानी भी तेज कर दी गई है और प्रतिदिन शिविरों की रिपोर्टिंग की जा रही है।
पूरे उत्तर प्रदेश में बाढ़ से अब तक 1.08 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य सरकार की ओर से 901 मेडिकल टीमों की तैनाती की गई है और 377 राहत शिविरों में करीब 18 हजार लोग शरण ले चुके हैं। फर्रुखाबाद में भी राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि जहां एक ओर पानी और गंदगी से घर-आंगन डूब गए हैं, वहीं राहत सामग्री और चारे की कमी से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। प्रशासन ने एंटी-लार्वा छिड़काव और क्लोरीन की गोलियां बांटने का काम तेज कर दिया है, लेकिन हालात सामान्य होने में अभी समय लगेगा।जिले की यह बाढ़ 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है और स्थानीय लोग इसे अब तक की सबसे भीषण आपदा बता रहे हैं।
गंगा रामगंगा की बाढ़ से हाहाकार, हजारों परिवार प्रभावित, दर्जनों गांव जलमग्न


