– तस्करी, हादसे और मौत – परिवहन विभाग बना मौनदर्शक**
हृदेश कुमार
फर्रुखाबाद | जनपद में परिवहन व्यवस्था का जो हाल है, वह चौंकाने वाला ही नहीं बल्कि बेहद खतरनाक भी है। जिले में दर्जनों अवैध रूप से संचालित प्राइवेट बसें रोज़ाना फर्राटा भर रही हैं, लेकिन इन्हें न कोई रोकने वाला है और न ही जांचने वाला। ये बसें खुलेआम न सिर्फ यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं, बल्कि जिले की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी हैं।
इन बसों की सबसे खतरनाक बात यह है कि इनकी डिग्गियों में चोरी-छिपे दूसरे राज्यों से कीमती व अवैध सामान की आवाजाही की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, ड्रग्स, नकली ब्रांडेड वस्तुएं और अन्य कई संदिग्ध सामग्री का परिवहन इन डिग्गियों से किया जा रहा है। यह तस्करी न तो चेकपोस्ट पर पकड़ी जाती है, न ही विभाग के पास कोई रिकॉर्ड होता है।
जिले में इस काले खेल को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और परिवहन विभाग की चुप्पी गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस तरह से बिना रजिस्ट्रेशन, फिटनेस और वैध परमिट के बसों का संचालन हो रहा है, वह किसी भी दिन जिले को किसी बड़े हादसे या अपराध के जाल में फंसा सकता है।
फर्रुखाबाद में बीते कुछ वर्षों में दर्जनों बस हादसे हुए हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कई घटनाएं ओवरलोडिंग, तकनीकी खराबी, चालक की लापरवाही और बस की खराब स्थिति के चलते हुई थीं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो बस संचालकों पर कार्रवाई हुई, न परिवहन विभाग ने सबक लिया।
बस मालिकों की सेटिंग इतनी मजबूत है कि विभागीय अधिकारी भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। माना जा रहा है कि ‘महीने की मोटी कमाई’ ने प्रशासनिक अमले की आंखों पर पट्टी बांध दी है। पुलिस चौकियों से लेकर परिवहन कार्यालय तक, हर जगह इस खेल की चर्चा है, लेकिन कार्रवाई शून्य।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो कुछ प्राइवेट बस संचालक कुछ वर्षों में ही करोड़ों के मालिक बन चुके हैं। न जमीन खरीदी का हिसाब है, न ही आय का कोई पारदर्शी स्रोत। साफ है कि या तो काला कारोबार है, या फिर बड़े घोटाले की तैयारी।
सुरक्षा विशेषज्ञ राजीव मिश्रा का कहना है,
“यदि किसी जिले में बिना निगरानी के सैकड़ों किलोमीटर दूर से आने वाली बसें बिना स्कैनिंग, बिना जांच के सामान लाती हैं, तो यह सीधे तौर पर सुरक्षा में सेंध है। प्रशासन को तुरंत कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।”
क्या किसी बड़ी घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा?
क्या तस्करी, ओवरलोडिंग और मौत का यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा?
क्या बस संचालकों की सेटिंग पर कभी गिरेगी कानून की गाज?