फर्रुखाबाद। विश्व मिल्क डे के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक विशेष दृश्य देखने को मिला, जब जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने अस्पताल में भर्ती एक छोटी बच्ची को अपने हाथों से दूध पिलाया और उसका आत्मीय इंटरव्यू लेकर उसकी शिक्षा व परिवार की स्थिति की जानकारी ली।
जब जिलाधिकारी ने बच्ची से उसकी पढ़ाई-लिखाई के बारे में पूछा और यह जाना कि वह एक सरकारी स्कूल में पढ़ती है, तो उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा —
“सरकारी स्कूल में पढ़ना गर्व की बात है। हमने भी सरकारी विद्यालय से पढ़ाई की है, और आज इस पद पर पहुंचा हूं। बच्चों को चाहिए कि वे दिल खोलकर पढ़ें और कभी खुद को कमतर न समझें।”
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने न केवल छोटे बच्चों को दूध पिलाया और उपहार में भेंट दिया, बल्कि कई बुजुर्ग माताओं से भी आत्मीय संवाद किया। वे वार्डों में घूम-घूमकर मरीजों से मिलते रहे और हर किसी का हालचाल जानकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करते रहे।
“बच्चों के चेहरे पर जब मुस्कान आती है, तो लगता है जैसे पूरा दिन सार्थक हो गया,” जिलाधिकारी ने एक बुजुर्ग महिला से संवाद के दौरान कहा।

इस आयोजन की अगुवाई समाजसेवी शैलेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में नंदिनी परिवार द्वारा की गई थी। दूध वितरण कार्यक्रम को जिलाधिकारी की इस आत्मीय भागीदारी ने भावनात्मक ऊंचाई दी। उपस्थित नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने जिलाधिकारी की सादगी और संवेदनशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि “वह एक अफसर नहीं, एक अपनापन देने वाले इंसान हैं।”
जिलाधिकारी ने बच्चों को पढ़ाई में मन लगाने, मेहनत से आगे बढ़ने और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा —
“आज भी अगर एक बच्चा सरकारी स्कूल से निकलकर अफसर बनने का सपना देखता है, तो वह सपना पूरा हो सकता है — जरूरी है मेहनत और लगन।”
कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सकों, अस्पताल स्टाफ और अन्य जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा के साथ मानवीय भावनाओं का ऐसा समन्वय कम ही देखने को मिलता है।

विश्व मिल्क डे का यह आयोजन केवल स्वास्थ्य और पोषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी की ओर से समाज को दिए गए मानवीय संदेश के रूप में भी याद रखा जाएगा।



