DMK सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए. राजा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही इसका विरोध करती रही है। चेन्नई में DMK संसदीय दल की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में राजा ने कहा कि कांग्रेस को DMK के रुख पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। बैठक में पार्टी ने चार प्रस्ताव पारित किए, जिनमें SIR के विरोध और इससे जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष सामने रखा गया।
ए. राजा के मुताबिक, DMK ने SIR के खिलाफ संसद के भीतर और बाहर लगातार आवाज उठाई है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने और उनके मतदान के अधिकार प्रभावित होने का खतरा है। राजा ने कहा कि पार्टी का प्रस्ताव तमिलनाडु की जनता और देश के राजनीतिक पर्यवेक्षकों के सामने SIR के खिलाफ उसके रुख और अब तक उठाए गए कदमों को स्पष्ट करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
DMK और कांग्रेस के बीच तमिलनाडु में लंबे समय तक गठबंधन रहा, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए। दिए गए विवरण के अनुसार, कांग्रेस ने अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को समर्थन दिया। इसके बाद DMK और कांग्रेस के बीच मतभेद और गहरे हो गए। SIR के मुद्दे पर भी DMK ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर विरोध करने के बावजूद कांग्रेस तमिलनाडु और केरल में इसी तरह के मुद्दों पर अलग रुख अपनाती दिखाई देती है।
DMK के प्रस्ताव में TVK प्रमुख विजय की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को हटाने की मांग पर उनके रुख को लेकर स्पष्टीकरण की जरूरत बताई। DMK का दावा है कि लोकतांत्रिक ताकतों ने TVK के साथ मिलकर SIR के खिलाफ प्रदर्शनों में हिस्सा लिया है। इस घटनाक्रम से तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन संबंधों और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर बहस तेज होने के संकेत हैं। हालांकि, SIR को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के आरोपों और दावों का आकलन संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए।


