लॉन्च करने का लक्ष्य
नई दिल्ली। भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन को बड़ी सफलता मिली है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल को अलग करने वाले सेपरेशन सिस्टम के परीक्षण पूरे कर लिए हैं। यह तकनीक अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ISRO का लक्ष्य वर्ष 2026 में गगनयान का पहला मानवरहित मिशन लॉन्च करना है।
गगनयान का ऑर्बिटल मॉड्यूल दो प्रमुख हिस्सों से मिलकर बना है—क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल। लॉन्च के बाद मिशन के दौरान दोनों मॉड्यूल एक यूनिट की तरह काम करते हैं। इनके बीच बिजली और तरल पदार्थों की आपूर्ति के लिए विशेष अंबिलिकल कनेक्शन होते हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने से पहले क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से अलग किया जाता है।
ISRO ने इस सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन और कार्यक्षमता की पुष्टि के लिए विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में परीक्षण किए। इसके लिए दोनों मॉड्यूल की संयुक्त संरचना तैयार की गई और पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए कई इंस्ट्रूमेंट लगाए गए। परीक्षणों से सिस्टम की क्षमता और क्रू मॉड्यूल की झटके सहने की मजबूती का आकलन किया गया।
परीक्षण के दौरान एवियोनिक्स सिस्टम, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम और क्रू मॉड्यूल की अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों की भी जांच की गई। इसके अलावा, अंबिलिकल शील्ड, क्रू मॉड्यूल को सही स्थिति में लाने वाले सिस्टम और तापमान व नमी नियंत्रित करने से जुड़े उपकरणों का परीक्षण किया गया। इन सफल परीक्षणों से गगनयान मिशन की तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


