राहुल गांधी ने गुरुवार को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी मामले की जांच पूरी होने तक गौतम को राज्यपाल का पदभार ग्रहण करने से रोका जाना चाहिए। इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, गौतम की नियुक्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोपों और मांगों पर संबंधित पक्षों का रुख भी महत्वपूर्ण है।
इसी दिन अंकिता भंडारी के माता-पिता ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रोकने की मांग की और सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। परिवार की मांग है कि मामले से जुड़े सवालों की जांच की जाए और उन्हें न्याय मिले। इस मामले में परिवार की ओर से उठाए गए मुद्दों को लेकर आगे सरकार और संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।
दूसरी ओर, दलित बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस के नाम एक खुला पत्र लिखा है। इसमें पार्टी से कहा गया है कि नैतिकता की बात केवल बयानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसके आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए। इस पत्र के जरिए कांग्रेस से मामले पर अपने रुख और कदमों को लेकर स्पष्टता दिखाने की मांग की गई है। इस तरह अंकिता भंडारी केस को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पक्ष अपनी मांगें सामने रख रहे हैं।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। साल 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। मामले को लेकर आरोप सामने आए थे कि एक VIP को विशेष सेवाएं देने से इनकार करने के बाद उनकी हत्या हुई। हालांकि, उस VIP की पहचान को लेकर सवाल अब भी उठते रहे हैं। इस मामले में किसी भी व्यक्ति की भूमिका के बारे में निष्कर्ष जांच और उपलब्ध आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।


