ओटीपी से राशन वितरण की सुविधा वर्ष 2017 से लागू, फिंगरप्रिंट न मिलने पर आइरिस स्कैन या परिवार के दूसरे सदस्य से सत्यापन का विकल्प
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुफ्त राशन प्राप्त करने के लिए नया मोबाइल खरीदने और ओटीपी सत्यापन को अनिवार्य किए जाने की खबरों पर खाद्य एवं रसद विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने कहा है कि राशन लेने के लिए किसी भी लाभार्थी को नया मोबाइल खरीदने की जरूरत नहीं है। सोशल मीडिया पर इस संबंध में प्रसारित हो रही सूचनाओं को विभाग ने भ्रामक बताया है और लोगों से ऐसी खबरों पर विश्वास न करने की अपील की है।
खाद्य एवं रसद विभाग के अपर आयुक्त सत्यदेव की ओर से जारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, प्रदेश में उचित दर की दुकानों पर पहले की तरह ई-पॉस मशीनों के माध्यम से राशन वितरण किया जा रहा है। खाद्यान्न की तौल इलेक्ट्रॉनिक वेइंग स्केल से की जाती है। विभाग का कहना है कि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्धारित सत्यापन व्यवस्था लागू है, लेकिन इसके लिए नया मोबाइल खरीदने की कोई अनिवार्यता नहीं है।
विभाग ने बताया कि राशन वितरण के दौरान सामान्य रूप से लाभार्थियों का बायोमीट्रिक सत्यापन किया जाता है। यदि किसी लाभार्थी का फिंगरप्रिंट पहली बार में मशीन से मेल नहीं खाता, तो उसी दिन दो अतिरिक्त अवसर दिए जाते हैं। इसके बाद भी सत्यापन नहीं होने पर आइरिस स्कैन यानी आंखों की पुतली के माध्यम से पहचान की पुष्टि करने का विकल्प उपलब्ध है।
यदि किसी कारण से संबंधित लाभार्थी का बायोमीट्रिक या आइरिस सत्यापन संभव नहीं हो पाता, तो राशन कार्ड में दर्ज परिवार का कोई दूसरा सदस्य अपनी पहचान का सत्यापन कराकर खाद्यान्न प्राप्त कर सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि तकनीकी समस्या या अंगुलियों के निशान नहीं मिलने के कारण पात्र परिवार राशन से वंचित न रहें।
विभाग के अनुसार, ओटीपी आधारित राशन वितरण कोई नई व्यवस्था नहीं है। यह सुविधा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद वर्ष 2017 से ही प्रभावी है। इसका इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में किया जाता है। यह विकल्प मुख्य रूप से उन अत्यंत वृद्ध, दिव्यांग या गंभीर रूप से बीमार राशन कार्ड धारकों के लिए है, जिनका बायोमीट्रिक और आइरिस के माध्यम से भी सत्यापन नहीं हो पाता।
विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में 3.41 करोड़ से अधिक राशन कार्ड हैं। इनमें से केवल 83,093 राशन कार्डों पर ओटीपी आधारित वितरण दर्ज किया गया है। विभाग ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ओटीपी के जरिए राशन वितरण सीमित परिस्थितियों में किया जाता है और इसे सभी लाभार्थियों के लिए अनिवार्य नहीं बनाया गया है।
खाद्य एवं रसद विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि मुफ्त राशन को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अपुष्ट खबरों से भ्रमित न हों। राशन वितरण के लिए नया मोबाइल खरीदने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी लाभार्थी को उचित दर की दुकान पर सत्यापन या राशन प्राप्त करने में परेशानी आती है, तो वह संबंधित विभागीय अधिकारियों से जानकारी लेकर अपनी समस्या का समाधान करा सकता है।
मुफ्त राशन के लिए नया मोबाइल खरीदना जरूरी नहीं, यूपी सरकार ने दूर किया भ्रम


