धूल फांक रही बिल्डिंग
क्रासर
हैंडओवर के बाद भी मरीजों को नहीं मिल पा रही क्रिटिकल केयर की पूरी सुविधा, खाली पड़ी है पूरी बिल्डिंग
फर्रुखाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय परिसर में गंभीर मरीजों को बेहतर और अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया क्रिटिकल केयर ब्लॉक (सीसीबी) भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती न होने के कारण इसका पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह भवन लंबे समय से लगभग खाली पड़ा है और उपयोग के इंतजार में धूल फांक रहा है।
बताया जा रहा है कि क्रिटिकल केयर ब्लॉक का भवन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय को हैंडओवर भी किया जा चुका है। इसके बावजूद भवन को पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में लोहिया अस्पताल में तैनात सर्जन डॉ. अक्षय जॉयल और डॉ. ऋषिकांत वर्मा को क्रिटिकल केयर ब्लॉक में बैठाकर कुछ मरीजों को देखा जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आवश्यक स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण पूरी बिल्डिंग का संचालन नहीं हो पा रहा है।
गंभीर मरीजों को मिलनी थी बड़ी राहत
क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण गंभीर हालत वाले मरीजों को तत्काल बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी। ब्लॉक शुरू होने से मरीजों को बेहतर निगरानी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं और गंभीर स्थिति में आवश्यक उपचार मिल सकता था।
लेकिन भवन तैयार होने के बावजूद पर्याप्त चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी और अन्य आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध न होने से इसका संचालन प्रभावित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब भवन तैयार होकर स्वास्थ्य विभाग के सुपुर्द किया जा चुका है तो इसे पूरी क्षमता से संचालित करने के लिए आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था कब होगी।
संसाधन तैयार, मानव संसाधन का इंतजार
लोहिया अस्पताल में पहले से ही मरीजों की संख्या काफी अधिक रहती है। गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए क्रिटिकल केयर ब्लॉक को महत्वपूर्ण सुविधा माना जा रहा है। भवन और अन्य व्यवस्थाएं तैयार होने के बाद अब सबसे बड़ी जरूरत विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की है।
स्थानीय लोगों और मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी सुविधा तैयार होने के बाद भी इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है तो इसका सीधा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
पूरी क्षमता से संचालन की दरकार
स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती क्रिटिकल केयर ब्लॉक को पूरी क्षमता से शुरू करने की है। चिकित्सकों और कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती होने के बाद ही इस भवन का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकेगा। फिलहाल भवन तैयार होने के बावजूद सीमित स्तर पर मरीजों को देखे जाने से सवाल उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपये की स्वास्थ्य सुविधा का मरीजों को पूरा लाभ आखिर कब मिलेगा।
करोड़ों की लागत से तैयार क्रिटिकल केयर ब्लॉक, डॉक्टर-कर्मचारियों के अभाव में


