नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें दादा-दादी की मृत्यु के बाद उनके पोते को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दिए जाने का रास्ता साफ किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए संबंधित मामले में दखल देने से इनकार कर दिया। अदालत के इस रुख के बाद अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में पारिवारिक परिस्थितियों और आश्रित सदस्य की स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने आया है।
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार के सामने उत्पन्न आर्थिक संकट में सहायता उपलब्ध कराना है। हालांकि ऐसी नियुक्ति स्वतः मिलने वाला अधिकार नहीं है और इसके लिए संबंधित सेवा नियमों तथा परिस्थितियों को देखा जाता है।
मध्य प्रदेश के इस मामले में हाई कोर्ट ने पोते को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।


