लखनऊ। विदेशी शराब के शौकीनों के लिए आने वाले दिनों में राहत की खबर सामने आ सकती है। मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए ) के तहत आयातित शराब पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में कमी का रास्ता साफ होने के बाद विदेशी शराब की कीमतों में गिरावट की संभावना जताई जा रही है। कस्टम ड्यूटी कम होने का सीधा असर आयात की लागत पर पड़ेगा और इसका लाभ आगे चलकर उपभोक्ताओं को मिल सकता है।
मौजूदा व्यवस्था में विदेश से आयात होने वाली शराब की कीमत में कस्टम ड्यूटी का महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल होता है। आयात के समय लगने वाला शुल्क कम होने पर कंपनियों की लागत घटेगी। इसके बाद नई लागत और लागू करों के आधार पर विदेशी शराब के खुदरा दामों का पुनर्निर्धारण किया जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक, कस्टम ड्यूटी में प्रस्तावित कमी का असर विदेशी शराब की कीमतों पर पड़ने पर 15 से 25 फीसदी तक की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि यह कमी सभी ब्रांड और सभी उत्पादों पर एक समान हो, यह जरूरी नहीं है। अलग-अलग ब्रांड, शराब की श्रेणी, आयात लागत और लागू करों के आधार पर कीमतों में अंतर रह सकता है।
एफटीए के तहत शुल्क में बदलाव लागू होने के बाद आयातकों और कंपनियों की लागत संरचना में परिवर्तन होगा। इसके बाद विदेशी शराब की कीमतों को नई कस्टम ड्यूटी के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। यानी कस्टम ड्यूटी जितनी कम होगी, आयात लागत पर उतना ही असर पड़ेगा। हालांकि अंतिम खुदरा कीमत में राज्य के आबकारी शुल्क, वैट/अन्य लागू कर, मार्जिन और वितरण लागत की भी भूमिका होगी।
विदेशी शराब की कीमतों में संभावित कमी का सबसे सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर प्रीमियम और इम्पोर्टेड ब्रांडों की कीमतों में कमी आने पर बाजार में इनकी मांग बढ़ सकती है। शराब कारोबार से जुड़े लोगों की नजर अब FTA के तहत शुल्क में होने वाले वास्तविक बदलाव और उसके बाद जारी होने वाली नई मूल्य सूची पर है।
हालांकि 15-25 फीसदी की कमी अभी एक अनुमानित संभावना के तौर पर देखी जा रही है। वास्तविक कीमतों में कितनी कमी होगी, यह कस्टम ड्यूटी में अंतिम कटौती और उत्तर प्रदेश में लागू आबकारी कर एवं मूल्य निर्धारण व्यवस्था के बाद ही स्पष्ट होगा।


