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Wednesday, September 30, 2026

सार्वजनिक निगाहों में: युवाओं को नशे से बचाने में प्रभावशाली व्यक्तित्वों की नैतिक जिम्मेदारी

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डॉ. विजय गर्ग

युवा केवल कक्षाओं, पुस्तकों और माता-पिता से ही नहीं सीखते। वे उन लोगों से भी सीखते हैं जिन्हें वे देखते, पसंद करते और अपना आदर्श मानते हैं। सेलिब्रिटी, खिलाड़ी, कलाकार, मनोरंजन जगत से जुड़े लोग, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अन्य सार्वजनिक व्यक्तित्व, विशेषकर सोशल मीडिया के माध्यम से, युवाओं पर व्यापक सांस्कृतिक प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे प्रभाव के साथ एक महत्वपूर्ण नैतिक प्रश्न भी जुड़ता है—क्या सार्वजनिक व्यक्तित्वों को युवाओं में नशे की रोकथाम के लिए अधिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए?

इस प्रश्न का उत्तर उनकी सार्वजनिक दृश्यता की शक्ति को समझने से शुरू होता है। किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के शब्द, जीवनशैली और सार्वजनिक व्यवहार कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकते हैं। युवा अपने पसंदीदा व्यक्तित्वों के पहनावे, भाषा, आदतों और व्यवहार को अपनाने का प्रयास कर सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि युवाओं के निर्णयों के लिए सेलिब्रिटी ही जिम्मेदार हैं, लेकिन उनका प्रभाव उस सामाजिक वातावरण को प्रभावित कर सकता है जिसमें युवा अपने निर्णय लेते हैं।

नशे का दुरुपयोग केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है। इसका प्रभाव परिवार, शिक्षा, रोजगार, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा तक पड़ सकता है। युवा साथियों के दबाव, जिज्ञासा, तनाव, सामाजिक वातावरण या भ्रामक ऑनलाइन सामग्री के कारण नशीले पदार्थों के संपर्क में आ सकते हैं। इसलिए रोकथाम केवल चेतावनी देने से संभव नहीं है। इसके लिए सही जानकारी, सहयोगी परिवार, जिम्मेदार विद्यालय और आसानी से उपलब्ध पेशेवर सहायता आवश्यक है।

सार्वजनिक व्यक्तित्व अपने मंचों का उपयोग नशीले पदार्थों से जुड़े जोखिमों के बारे में स्पष्ट और प्रमाण-आधारित संदेश देने के लिए कर सकते हैं। नशीली वस्तुओं के सेवन को फैशनेबल, विद्रोही या आकर्षक दिखाने के बजाय प्रभावशाली व्यक्तित्व स्वस्थ जीवनशैली, जिम्मेदार निर्णय लेने और तनाव से निपटने के रचनात्मक तरीकों को बढ़ावा दे सकते हैं।

खिलाड़ियों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि युवा अक्सर खेल उपलब्धियों को अनुशासन और स्वस्थ जीवन से जोड़ते हैं। कलाकार और मनोरंजन जगत से जुड़े लोग भी अपनी लोकप्रियता का उपयोग रचनात्मकता, फिटनेस, शिक्षा और सार्थक सामाजिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए कर सकते हैं। डिजिटल इन्फ्लुएंसर ऐसे युवाओं तक भी पहुंच सकते हैं, जिन तक पारंपरिक जागरूकता अभियान आसानी से नहीं पहुंच पाते।

हालांकि, नैतिक जिम्मेदारी का अर्थ सार्वजनिक व्यक्तित्वों से पूर्णता की अपेक्षा करना नहीं है। सेलिब्रिटी भी निजी जीवन वाले व्यक्ति हैं और उनकी व्यक्तिगत कठिनाइयों को सार्वजनिक अपमान का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि किसी सार्वजनिक व्यक्ति ने नशे की लत या उससे उबरने का अनुभव किया है, तो वह अपनी कहानी जिम्मेदारी से साझा करके नशे से जुड़े कलंक को कम करने और लोगों को उपचार लेने के लिए प्रेरित करने में योगदान दे सकता है। ध्यान सनसनी फैलाने के बजाय शिक्षा, उपचार, पुनर्वास और रोकथाम पर होना चाहिए।

मीडिया की भी अपनी जिम्मेदारी है। नशीले पदार्थों के सेवन को बार-बार ग्लैमर, विवाद या मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत करना अनजाने में हानिकारक व्यवहार को आकर्षक बना सकता है। जिम्मेदार पत्रकारिता को अनावश्यक सनसनी से बचना चाहिए और नशे के जोखिमों, उपचार तथा सहायता सेवाओं के बारे में उचित जानकारी देनी चाहिए।

नशे की रोकथाम में माता-पिता और शिक्षक भी केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। किसी सेलिब्रिटी का संदेश घर में होने वाली बातचीत या विद्यालय में मिलने वाले मार्गदर्शन का स्थान नहीं ले सकता। युवाओं को ऐसा सुरक्षित वातावरण चाहिए जहां वे साथियों के दबाव, तनाव, जिज्ञासा और कठिन अनुभवों के बारे में बिना तुरंत आलोचना या दंड के डर के बात कर सकें। खुला संवाद उन्हें समय रहते सहायता मांगने में मदद कर सकता है, इससे पहले कि प्रयोग गंभीर नशे की समस्या में बदल जाए।

सरकार, विद्यालय, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, सामाजिक संगठन और सार्वजनिक व्यक्तित्व मिलकर नशा-रोधी जागरूकता अभियान चला सकते हैं। ऐसे अभियान आयु के अनुरूप, वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित और वास्तविक सहायता सेवाओं से जुड़े होने चाहिए। केवल युवाओं से “नशे को ना कहो” कहना पर्याप्त नहीं हो सकता, यदि उन्हें यह पता ही न हो कि जब वे स्वयं या उनका कोई मित्र समस्या में हो तो सहायता कहां से प्राप्त करें।

इसके पीछे एक व्यापक नैतिक सिद्धांत भी है—प्रभाव के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। जितना बड़ा किसी व्यक्ति का दर्शक वर्ग और युवाओं के साथ उसका संबंध होता है, उतना ही अधिक अवसर उसके पास सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने का होता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सेलिब्रिटी को नैतिक प्राधिकारी बना दिया जाए। यह केवल एक सामाजिक अपेक्षा है कि असाधारण सार्वजनिक प्रभाव रखने वाले लोग अपने संदेशों के संभावित प्रभावों के प्रति सजग रहें।

युवाओं को आदर्श व्यक्तित्वों की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें आलोचनात्मक सोच की भी जरूरत है। उन्हें यह समझना चाहिए कि लोकप्रियता किसी व्यवहार को स्वतः सुरक्षित नहीं बना देती और किसी सेलिब्रिटी की जीवनशैली हमेशा स्वस्थ जीवन का आदर्श नहीं होती। विद्यालय युवाओं को विज्ञापन, सोशल मीडिया के प्रभाव और अनुकरण की मनोविज्ञान को समझने में मदद कर सकते हैं, ताकि प्रशंसा बिना सोचे-समझे अनुकरण में न बदल जाए।

अंततः, युवाओं को नशे से बचाना साझी जिम्मेदारी है। सेलिब्रिटी अकेले इस समस्या का समाधान नहीं कर सकते, लेकिन वे नशे के प्रति समाज के दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकते हैं। अपनी सार्वजनिक पहुंच का जिम्मेदारी से उपयोग करके, प्रमाण-आधारित रोकथाम का समर्थन करके, नशीले पदार्थों के सेवन के महिमामंडन से बचकर और युवाओं को सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करके सार्वजनिक व्यक्तित्व अपने प्रभाव को सकारात्मक सामाजिक शक्ति में बदल सकते हैं।

प्रसिद्धि ध्यान आकर्षित करती है; नैतिक नेतृत्व उस ध्यान का जिम्मेदारी से उपयोग करना सिखाता है।

डॉ. विजय गर्ग

डॉ. विजय गर्ग
रिटायर्ड प्रिंसीपल | एमिनेंट साइंटिस्ट | एजुकेशनल कॉलमनिस्ट
मलोट, पंजाब– 152107
Mobile: 9465682110

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