नई दिल्ली
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ दिल्ली में बैठक की। चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर की प्रारूप मतदाता सूचियों से जिन लोगों के नाम हटे हैं, उनके दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समय सीमा बढ़ाई गई है। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं को नाम का पिछली सूची से मिलान नहीं होने या अभिलेखों में गड़बड़ी के कारण सूचना दी गई है, उन्हें अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जाएगा।
आयोग के मुताबिक, ऐसे मामलों में बूथ स्तर के अधिकारी यानी बीएलओ संबंधित मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। इसके बाद क्षेत्रीय निर्वाचक अधिकारी इन दस्तावेजों और दावों की जांच कर निर्णय लेंगे। आयोग ने यह भी कहा है कि रात्रि आश्रय गृहों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त सहायता केंद्र या विशेष शिविर लगाए जाएंगे, ताकि पात्र मतदाताओं को प्रक्रिया में शामिल होने में परेशानी न हो।
एसआईआर के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों में अब तक 13.37 करोड़ नाम कम होने की रिपोर्ट सामने आई है। यह आंकड़ा 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रारूप सूचियों से जुड़े बदलावों को दर्शाता है। चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण और अद्यतन करना है। इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस जारी है।
तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों के बाद यह बैठक और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कई बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन खबरों को लेकर स्पष्ट किया है कि एसआईआर समेत आयोग के सभी फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इस बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।


