नई दिल्ली
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई होती है तो न्यायपालिका उनके अधिकारों की रक्षा करेगी। शनिवार को पटना स्थित चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में कानून के छात्रों के साथ सीधे संवाद के दौरान उन्होंने कॉलेजियम में दर्ज असहमति, बढ़ती फीस, छात्रवृत्ति और पहली पीढ़ी के वकीलों की आर्थिक चुनौतियों से जुड़े सवालों के जवाब दिए। कार्यक्रम में पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव तथा कुलपति प्रोफेसर फैजान मुस्तफा भी मौजूद रहे।
कॉलेजियम में दर्ज असहमति को सार्वजनिक नहीं किए जाने के सवाल पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी टिप्पणियों को सार्वजनिक करने से संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा और गरिमा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम में किसी नाम पर विचार करते समय की गई नकारात्मक टिप्पणी या असहमति को सार्वजनिक करने से उस व्यक्ति के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है। इसलिए निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करना भी जरूरी है। छात्रों ने विश्वविद्यालय में बढ़ती फीस और पर्याप्त छात्रवृत्ति नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए मामले पर ध्यान देने की बात कही।
पहली पीढ़ी के वकीलों की आर्थिक मुश्किलों पर पूछे गए सवाल के जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने युवा वकीलों को शुरुआती वर्षों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत पर चर्चा की। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के हालिया एक मामले का उल्लेख करते हुए पेशेवर सहायता कोष जैसे तंत्र की आवश्यकता की बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल में प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मामला भी न्यायालय पहुंचा था। न्यायालय ने संबंधित मामलों को समाप्त करने और जेल में बंद छात्रों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था।


