अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता: मुख्यमंत्री
पिछले एक सप्ताह में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले, हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, सैफई सिंडिकेट गिनती रहे: सीएम योगी
जिनके कारनामों से प्रदेश थर्राता था और दुनिया शक की निगाहों से देखती थी, वे आज उपदेश देते फिर रहे: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित 3567 अभ्यर्थियों को वितरित किए नियुक्ति पत्र
चयनितों में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (पीजीटी) और सहायक अध्यापक (टीजीटी) के पद शामिल
2015-16 में जिस अभ्यर्थी से मांगे गए थे आठ लाख रुपये, उसी अभ्यर्थी का सपना हुआ साकार: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा- शिक्षक केवल नौकरी नहीं, नए भारत के निर्माण की आधारशिला तैयार करने का दायित्व संभालें
लखनऊ, 22 सितंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा कि अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता। इसीलिए उत्तर प्रदेश पुलिस में अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को आयोग और बोर्डों की दिशा-दशा सुधारने का दायित्व दिया गया है। पहले युवाओं को उनके अधिकार से वंचित कर दिया जाता था। लेकिन, अब नियुक्ति पाने वाले किसी भी अभ्यर्थी से पैसे की मांग करने वाले को जेल में सड़ना पड़ेगा। आज का कार्यक्रम केवल नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा से जुड़े चारों स्तंभ, सहायक अध्यापक, प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य को एक साथ जोड़ने वाला विशेष अवसर है। यहां 3,567 लोगों का चयन कर उनके हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने का महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया है।
हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं और पिछले एक सप्ताह में वह 5,297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित कर चुके हैं। पिछले नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। हमने सैफई सिंडिकेट से कहा है कि हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं। सीएम ने तंज कसा कि यदि गिनती नहीं आती हो तो शिवपाल जी के सानिध्य में बैठ जाएं, बहुत अच्छी गिनती सीख जाएंगे।
2015-16 में घूसखोरी का शिकार बने युवा का सपना साकार
मुख्यमंत्री ने हाल में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले एक नौजवान के इंटरव्यू का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस युवक की आंखों में आंसू भरे थे और उसने बताया कि 2015-16 में भी उसने इस पद के लिए आवेदन किया था। उससे आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। वह खेत बेचकर पैसा लेकर आया, लेकिन तब तक उससे अधिक पैसा देने वाला दूसरा व्यक्ति आ गया और वह नौकरी से वंचित रह गया। आज उसका सपना साकार हुआ है और जिस पद के लिए उसने आवेदन किया था, उसी पद पर उसे नियुक्ति मिल गई है। पूरी प्रक्रिया निरस्त की गई और उस युवा को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ।
किसी ने लेनदेन की बात की तो जेल में सड़ेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा सभी शिक्षकों को दी है। यह सुविधा शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी दी गई है। बेसिक शिक्षा में रसोइयों, शिक्षामित्रों और अन्य संबंधित कर्मियों को भी इसका लाभ दिया गया है, जिससे वे निश्चिंत होकर कार्य कर सकें। किसी भी शिक्षक को ज्वाइनिंग में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यदि किसी प्रबंधक की कोई जिज्ञासा है तो वह शासन के समक्ष उपलब्ध कराए, लेकिन नियुक्ति पत्र प्राप्त होने के बाद यदि किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से किसी ने लेनदेन की बात की तो उसे जेल में सड़ना पड़ेगा। हमें सख्त सख्त कार्रवाई पर मजबूर होना पड़ेगा।
अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ साल में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। अगले छह महीने के अंदर एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं। जब लोग परिणाम पूछते हैं तो मैं कहता हूं कि परिणाम यह है कि जो उत्तर प्रदेश नौ वर्ष पहले बीमारू राज्य कहा जाता था, आज भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बना हुआ है। बॉटम फाइव से टॉप-थ्री में आया है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता मिली है। यही युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा है।
यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा किया गया था
सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी के नौजवानों के लिए पूरी दुनिया खुली है। जिन लोगों ने उनके सामने पहचान का संकट खड़ा किया था, वे यहां नौकरी देते नहीं थे और दुनिया ‘यूपी वाला’ कहकर हमारे युवाओं को शक की निगाहों से देखती थी। जिनके कारनामों से प्रदेश थर्राता था, वही लोग आज उपदेश देते फिर रहे हैं। आज नियुक्ति पाने वालों में बहुत से ऐसे होंगे जिन्होंने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी होगी। कई ऐसे भी होंगे जिन्हें पहले अवसर नहीं मिला होगा। यदि किसी ने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी है तो स्वाभाविक रूप से दस वर्ष पहले उसकी उम्र 13 से 16-17 वर्ष के बीच रही होगी। उस उम्र में बच्चा मां-बाप पर ज्यादा आश्रित रहता है और माता-पिता उसकी हर जरूरत पूरी करने में योगदान देते हैं। ऐसे बच्चों को यह बताने की आवश्यकता है कि 2017 के पहले क्या होता था। परीक्षा कोई देता था और नियुक्ति पत्र उसे दिया जाता था, जिसने फॉर्म तक नहीं भरा होता था। यह अराजकता, बेईमानी और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा थी।
एक शिक्षक 100 छात्रों से संवाद करे तो 3,567 शिक्षक 3.5 लाख से अधिक बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि एक शिक्षक प्रतिवर्ष 100 छात्रों के साथ इंटरेक्शन करता है तो 3,567 शिक्षक एक वर्ष में 3.5 लाख से अधिक बच्चों के साथ संवाद और उनका मार्गदर्शन करेंगे। बच्चों को गाइड करना, उनका मार्गदर्शन करना ही नए भारत की आधारशिला है। भारत तब विश्वगुरु था, जब वह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों का संचालन करता था। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय भारत की धरोहर रहे हैं। यह धरोहर पहले से मौजूद है, केवल उसे पहचानने और जानने की आवश्यकता है। सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर दे सकती है, लेकिन उस इंफ्रास्ट्रक्चर पर गति कैसे होनी चाहिए, यह शिक्षक द्वारा प्रशिक्षित विद्यार्थी तय करेगा। सरकार उद्योग लगाने का माहौल दे सकती है और उद्योग लगाने में मदद कर सकती है, लेकिन वह उद्योग इनोवेशन और रोजगार का आधार बनेगा या नहीं, यह प्रशिक्षित छात्र तय करेंगे। सरकार लैब बना सकती है, लेकिन वह लैब बेहतरीन शोध का आधार बने और छात्र उसके योग्य बनें, यह शिक्षक द्वारा प्रशिक्षित विद्यार्थी तय करेंगे। जब यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, तभी आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना पूरी होगी।
श्रीराम, कृष्ण, चाणक्य से लेकर मालवीय और कलाम तक, गुरु की भूमिका रही विशिष्ट
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नियुक्ति पाने वाले सभी लोग एक बड़े और पवित्र अभियान के साथ जुड़ रहे हैं। उन्होंने श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके जीवन में पग-पग पर ऐसी परिस्थितियां आईं, जहां गुरु की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पहले गुरु वशिष्ठ का सानिध्य मिला। गुरुकुल में रहकर भगवान राम ने अपने अनुजों के साथ जीवन के बारे में जाना और गुरु विश्वामित्र के सानिध्य में आने पर जीवन का उद्देश्य समझा तथा दिव्य अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान प्राप्त किया। राम मर्यादा के आदर्श हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। जब यही गुरुतर दायित्व महर्षि वाल्मीकि के हाथों में आया तो उन्होंने वाल्मीकि रामायण के माध्यम से इसे आगे बढ़ाया। उत्तर और दक्षिण को जोड़ने का दायित्व जब महर्षि अगस्त्य के सामने आया तो उन्होंने भी उस कार्य को पूरा किया। चाणक्य का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे, लेकिन भारत के सामने मौजूद संकटों और विभाजित राजनीतिक ताकतों को देखकर उन्हें लगा कि केवल इससे काम नहीं चलेगा। किसी चंद्रगुप्त को तैयार करना होगा और उन्होंने पाटलिपुत्र में वह साम्राज्य खड़ा कर दिया।
धरनारत बच्चों के लिए एनसीटीई को पत्र लिखने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति का समाज में योगदान है, लेकिन शिक्षक की भूमिका अन्य से भिन्न है। एक प्रशासनिक अधिकारी अपने प्रशासनिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन कर सकता है, लेकिन वह अच्छा शिक्षक नहीं हो सकता। पुलिस अधिकारी अपने कार्यों के माध्यम से लोगों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा कर सकता है, लेकिन शिक्षक होने के लिए उसे भी सीखना पड़ता है। मैंने माध्यमिक शिक्षा मंत्री से कहा है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को पत्र लिखा जाए। प्रयागराज में कुछ युवा धरने पर बैठे हैं। एक बार के लिए उन बच्चों के लिए रिलैक्सेशन किया जाए अथवा ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि एक समय के बाद वे बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं में अपीयर हो सकें। कोई एक सिस्टम तैयार किया जाना चाहिए। जड़ता की शिकार व्यवस्था नौजवानों के हौसलों को रोकने का काम करती है।
9 साल में शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन
सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा दोनों की स्थिति बहुत बदहाल थी। बेसिक शिक्षा में जर्जर भवन थे, टॉयलेट की व्यवस्था नहीं थी, पेयजल की व्यवस्था नहीं थी। स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की बात तो दूर थी। बच्चों के लिए यूनिफॉर्म की भी व्यवस्था नहीं थी। ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत के तहत बेसिक शिक्षा परिषद में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। सैचुरेशन के टारगेट को 36 प्रतिशत से बढ़ाकर 96 प्रतिशत करने में सफलता मिली है। माध्यमिक शिक्षा में प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत अब तक 2,300 से अधिक विद्यालयों के नए भवन बने हैं और नया इंफ्रास्ट्रक्चर आया है। अच्छी लैब, लाइब्रेरी और क्लासरूम बनाए गए हैं।
स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी व अटल टिंकरिंग लैब से बच्चों को मिलेगा नया वातावरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और अच्छी लैबोरेटरी होगी तो बच्चे उससे प्रभावित होंगे। विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब बन रही हैं। औद्योगिक घरानों के साथ मिलकर स्किल डेवलपमेंट के नए-नए कार्यक्रम भी आगे बढ़ाए जा रहे हैं। यह काम 2017 के पहले भी हो सकता था, लेकिन रुचि का अभाव था। सरकार का विजन नहीं था और करने की इच्छाशक्ति नहीं थी। अपना एक सीमित एजेंडा था और उस सीमित एजेंडे के साथ यूपी के युवाओं के जीवन के साथ खिलवाड़ होता था।
2047 के भारत का नेतृत्व करने वाली पीढ़ी को तैयार करेंगे शिक्षक
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के सामने 2047 का लक्ष्य रखा है। आज जो नौजवान 13, 14 या 15 वर्ष का है, उसकी उम्र तब 33 से 38 वर्ष के बीच होगी। यही वर्ग उस समय भारत को नेतृत्व देने वाला होगा। कोई डॉक्टर बनेगा, कोई इंजीनियर, कोई सोशल वर्कर, कोई शिक्षक और कोई साइंटिस्ट। अलग-अलग क्षेत्रों में जाने वाले ये छात्र भारत को नेतृत्व देंगे और आगे बढ़ाने में योगदान करेंगे। कभी उन्हें स्मरण करना हो तो उनकी स्मृति में शिक्षक की तस्वीर होनी चाहिए। छात्र को यह भाव होना चाहिए कि आप उसके निर्माता हैं और आपके प्रति उसके मन में श्रद्धा हो। यह गुरुतर दायित्व शिक्षक को निभाना होगा। एक प्रिंसिपल का काम केवल विद्यालय का अनुशासन बनाए रखना नहीं है, बल्कि विद्यालय को छात्र की जिज्ञासा का केंद्र बनाना भी है। इसके लिए सकारात्मक वातावरण और परिस्थितियां पैदा करनी होंगी।
छात्रों को नकारात्मकता से बचाना और महापुरुषों से परिचित कराना भी शिक्षक का दायित्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक शिक्षक को सदैव शिक्षक की भूमिका में रहना चाहिए। समाज को बांटने वाले बहुत लोग होंगे। ऐसे लोगों से छात्रों को सावधान कराना भी शिक्षा का दायित्व होना चाहिए। बच्चों को पाठ्यक्रम के अलावा महापुरुषों की जीवनी के बारे में भी बताया जाए। देश और दुनिया में प्रतिदिन घटित होने वाली घटनाओं की जानकारी से अपडेट किया जाए। यह उनके जनरल नॉलेज के लिए भी उपयोगी होगा।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रशांत कुमार, सचिव माध्यमिक शिक्षा किंजल सिंह एवं माध्यमिक शिक्षा के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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योग्यता और मेरिट के आधार पर चयन: ब्रजेश पाठक
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने नवनियुक्त शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षक केवल बच्चों को पढ़ाने का कार्य नहीं करते, बल्कि समाज को दिशा देने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। भारत में गुरु-शिष्य परंपरा का गौरवशाली इतिहास रहा है और शिक्षकों ने हमेशा ज्ञान के साथ जीवन-मूल्यों की शिक्षा देने का काम किया है। नवनियुक्त शिक्षकों पर समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी है। शिक्षक प्रदेश की वर्तमान स्थिति और पूर्व की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए समाज को सही दिशा देने का कार्य करें। 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में अनेक चुनौतियां थीं, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इन क्षेत्रों में व्यापक बदलाव हुए हैं। प्रदेश में सड़कों का विस्तार हुआ है, बिजली की उपलब्धता में सुधार हुआ है और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गरीब कल्याण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। वर्तमान सरकार में नियुक्तियां पारदर्शी और मेरिट के आधार पर हो रही हैं और आज का कार्यक्रम इसका उदाहरण है।
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शिक्षकों की जिम्मेदारी चरित्र निर्माण की भी: गुलाब देवी
माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि आज योग्यता, परिश्रम और लगन के बल पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल रही है। अब उनकी वास्तविक जिम्मेदारी शुरू हो रही है। शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध भावनात्मक होता है और अभिभावक अपने बच्चों को शिक्षकों को इस विश्वास के साथ सौंपते हैं कि वे उन्हें ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन, चरित्र निर्माण, देशभक्ति और अच्छे व्यक्तित्व का विकास प्रदान करेंगे। शिक्षक स्वयं बच्चों के लिए आदर्श बनें, क्योंकि विद्यार्थी शिक्षक के व्यवहार, आचरण और कार्यशैली से सीखते हैं। नई शिक्षा नीति-2020 की भावना भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की है। सरकार शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दे रही है तथा शिक्षकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए भी अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। उन्होंने चयनित शिक्षकों से निष्ठा, सजगता, उमंग और उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
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इन्हें मंच पर मिला नियुक्ति पत्र
प्रधानाचार्य
राम सिंह, कानपुर नगर
राघवेंद्र प्रताप सिंह, वाराणसी
प्रवक्ता (पीजीटी)
आंचल शुक्ला, वाराणसी
अनुराग श्रीवास्तव, बरेली
प्रज्ञा सिंह, प्रयागराज
गोपाल प्रजापति, आजमगढ़
मोहम्मद शादाब, मुजफ्फरनगर
सहायक अध्यापक (टीजीटी)
कु. ऊषा सिंह, गोरखपुर
आकाश कुमार, संभल
रीना यादव, लखनऊ
सोनम त्रिपाठी, झांसी
अमन कुमार, कुशीनगर


