लखनऊ
चर्चित एप्पल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत के फैसले से परिवार संतुष्ट नहीं है। 21 सितंबर को अदालत ने पूर्व सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या के मामले में 10 साल के कारावास की सजा सुनाई, जबकि दूसरे आरोपी संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी ने कहा कि करीब आठ साल तक वह हर तारीख पर न्याय की उम्मीद में अदालत पहुंचती रहीं, लेकिन फैसला उनकी अपेक्षा के मुताबिक नहीं आया। उन्होंने कहा कि परिवार अब फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगा। सजा सुनाए जाने के दौरान कल्पना और परिवार का कोई सदस्य अदालत में मौजूद नहीं था।
मामले में मुख्य प्रत्यक्षदर्शी सना खान समेत कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। परिवार की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहियों को लेकर भी अदालत में बहस हुई। कल्पना तिवारी का कहना है कि मामले में अहम साक्ष्यों को पर्याप्त महत्व नहीं मिला और इसी आधार पर परिवार आगे कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।
यह घटना सितंबर 2018 में हुई थी, जब विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी के साथ कार से लौट रहे थे। पुलिसकर्मियों द्वारा कार रोकने के प्रयास के दौरान गोली चली, जिससे विवेक की मौत हो गई थी। करीब आठ साल चली सुनवाई के बाद 17 सितंबर 2026 को प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया और 21 सितंबर को उसे 10 साल की सजा सुनाई गई।


