प्रयागराज। बिजनौर जिला जेल में एक कैदी की हिरासत में मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए जेल प्रशासन और जेल प्रशासन एवं सुधार सेवाओं के महानिदेशक से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह एवं न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने महानिदेशक को 10 दिन के भीतर संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जवाब दाखिल नहीं हुआ तो महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा।
मामला बिजनौर जिला जेल में बंद दीपक कुमार की मौत से जुड़ा है। याचिका के अनुसार हाईकोर्ट ने दीपक को आठ मई को जमानत दी थी, लेकिन जमानत मिलने के दो दिन बाद ही 10 मई को उसकी जेल परिसर में मौत हो गई। याची चंद्रपाल की ओर से अदालत को बताया गया कि दीपक की पत्नी जमानत आदेश की जानकारी देने के लिए अगले दिन जेल पहुंची थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि मुलाकात के दौरान दीपक ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका भी जताई थी। इसके अगले दिन उसकी मौत की सूचना परिवार को फोन के जरिए दी गई। याचिका के अनुसार परिवार को बताया गया कि जेल परिसर स्थित अस्पताल में एक पेड़ से लटकने के कारण दीपक की मौत हुई।
दीपक कुमार को 18 फरवरी 2025 को भारतीय दंड संहिता की धारा 394, 411 तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 3/25 के तहत दोषी ठहराते हुए छह वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उसने दोषसिद्धि और सजा को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए जमानत की मांग की थी। हाईकोर्ट ने आठ मई को उसकी जमानत मंजूर की थी।
मामले में याची ने दीपक की मौत से संबंधित जेल परिसर की सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरें उपलब्ध कराने की भी मांग की है। हाईकोर्ट ने कहा कि हिरासत में हुई मौत जैसे गंभीर मामले में राज्य की ओर से संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया है। अदालत ने अब जेल प्रशासन एवं सुधार सेवाओं के महानिदेशक से मौत की परिस्थितियों और उससे जुड़े तथ्यों पर जवाब मांगा है।


