नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल नौ आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले में 16 आरोपियों में से सात को आरोपों से मुक्त कर दिया।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले में धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा तीन और चार के तहत कार्रवाई का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक अंतिम मानक लागू नहीं होते, बल्कि आरोप तय करने के लिए प्रथम दृष्टया मजबूत संदेह का होना पर्याप्त है। मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय करने की अगली प्रक्रिया तीन अक्टूबर को होगी।
मामला उस अवधि से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, रांची और पुरी स्थित आईआरसीटीसी होटलों के संचालन संबंधी ठेकों में कथित अनियमितताओं के बदले पटना की कीमती जमीन के हस्तांतरण से जुड़ा लेन-देन हुआ। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि जमीन बाद में लालू प्रसाद यादव के परिवार से जुड़ी कंपनी के नियंत्रण में पहुंची।
अदालत के आदेश के अनुसार लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा लारा प्रोजेक्ट्स, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, विजय कोचर और विनय कोचर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। वहीं गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव कुमार रेलन और एक कंपनी को मामले में आरोपों से मुक्त किया गया।
इस मामले में पहले सीबीआई की ओर से भी भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों के तहत कार्रवाई हो चुकी है। अब धनशोधन मामले में आरोप तय होने के बाद सुनवाई आगे बढ़ेगी और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों तथा साक्ष्यों पर अदालत में आगे विचार किया जाएगा। आरोप तय होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है; मामले में अंतिम निर्णय आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद होगा।


