फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत में अवैध रूप से बसाने और मानव तस्करी मामले में सजा
लखनऊ। लखनऊ की विशेष एनआईए अदालत ने भारत में अवैध रूप से प्रवेश, फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार कराने और मानव तस्करी से जुड़े मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। फैसला 17 सितंबर 2026 को सुनाया गया।
दोषियों की पहचान हाफिज शफीक उर्फ शबीउल्लाह, मोहम्मद इस्माइल, अजीजुर रहमान उर्फ अजीज और मुफीजुर रहमान उर्फ मुफीज के रूप में हुई है। अदालत ने विभिन्न धाराओं के तहत उन्हें दोषी माना।
अभियोजन के मुताबिक, मामले की जांच उत्तर प्रदेश एटीएस ने की थी। आरोप था कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए म्यांमार से लोगों को बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराने और बाद में आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र और मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों के जरिए भारतीय पहचान स्थापित कराने में मदद की जाती थी।
अदालत ने चारों को धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, मानव तस्करी और विदेशी नागरिकों से संबंधित कानूनों के तहत दोषी ठहराया। शफीक और अजीजुर रहमान को पासपोर्ट एक्ट की एक अतिरिक्त धारा में दो वर्ष की सजा भी सुनाई गई।


